Top 5 This Week

Related Posts

रूस से डीजल खरीदेगा अमेरिका, पुतिन से ट्रंप की बड़ी डील; भारत पर टैरिफ नीति को लेकर उठे सवाल

वॉशिंगटन। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की नीति अपनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब खुद रूस से डीजल खरीदने का एलान किया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद ट्रंप ने कहा कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार में डीजल की आपूर्ति करेगा। इस फैसले ने अमेरिकी ऊर्जा नीति और भारत पर लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि रूस तत्काल 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख मीट्रिक टन और आगे 10 लाख मीट्रिक टन डीजल की आपूर्ति की योजना है। उन्होंने अतिरिक्त आपूर्ति की भी बात कही है।

ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान अमेरिका

अमेरिका में ईंधन की कीमतें बढ़ने के बीच यह फैसला लिया गया है। ईरान युद्ध और वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल के कारण डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। इसका असर किसानों, ट्रक चालकों और परिवहन क्षेत्र पर पड़ रहा है। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईंधन की कीमतें सरकार के लिए एक अहम मुद्दा बन गई हैं।

ट्रंप ने कहा कि ईंधन की कीमतें कम करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उनका मानना है कि रूस से आपूर्ति बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात में सुधार होने पर कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

अप्रैल 2027 तक मिली अस्थायी छूट

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने रूसी डीजल की कुछ खेपों पर प्रतिबंधों से अस्थायी छूट देने की अनुमति जारी की है। यह छूट अप्रैल 2027 तक प्रभावी रहेगी। इससे रूस को अपना ईंधन अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने का अवसर मिलेगा।

भारत पर टैरिफ नीति को लेकर सवाल

इस घटनाक्रम के बाद अमेरिकी नीति में दोहरे मापदंडों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिका पहले रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत समेत अन्य देशों पर दबाव बनाता रहा है। अब खुद रूस से डीजल खरीदने की पहल ने उसकी नीति की आलोचना को हवा दी है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से अतिरिक्त डीजल मिलने के बावजूद अमेरिकी बाजार में कीमतों में बड़ी गिरावट की गारंटी नहीं है। वैश्विक आपूर्ति की कमी और अन्य बाजारों की मांग के कारण इस फैसले का असर सीमित रह सकता है।

फिलहाल, ट्रंप-पुतिन की यह डील ऊर्जा जरूरतों और रूस पर दबाव बनाने की अमेरिकी नीति के बीच बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाती है।

Popular Articles