नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री वाले कथित विज्ञापनों के मामले में मेटा इंडिया पर जांच का दबाव बढ़ गया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के समक्ष मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और अन्य वरिष्ठ अधिकारी एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार पेश हुए। आयोग इस मामले में तथ्यों की जांच कर रहा है।
मामला एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद चर्चा में आया था। रिपोर्ट में इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से संबंधित सामग्री वाले विज्ञापनों का आरोप लगाया गया था। NCPCR ने 3 जुलाई को मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मेटा से स्पष्टीकरण मांगा था। कंपनी ने इसके बाद आयोग को अपना जवाब सौंपा।
सरकार ने जारी किया था कड़ा निर्देश
इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भी मेटा को कड़ा नोटिस जारी किया था। मंत्रालय ने इंस्टाग्राम पर ऐसी सामग्री को बढ़ावा देने या उस तक पहुंच आसान बनाने वाले विज्ञापनों और कंटेंट को हटाने तथा विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा था।
भारतीय साइबर पोर्टल पर सीधे रिपोर्टिंग
बढ़ती सरकारी सख्ती के बीच मेटा ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे भारतीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर देने का फैसला किया है। यह पोर्टल गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) संचालित करता है। इससे ऐसे मामलों की जानकारी भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक सीधे पहुंचने की व्यवस्था मजबूत होगी।
मेटा ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है और वह अपराधियों को जवाबदेह ठहराने के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग करेगा। कंपनी ने यह भी कहा है कि उसने नियमों का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों और खातों के खिलाफ कार्रवाई की है।
NCPCR की जांच और सरकार की कार्रवाई के बीच अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक एवं गैरकानूनी सामग्री की निगरानी, रिपोर्टिंग और समय पर कार्रवाई को लेकर जवाबदेही का मुद्दा केंद्र में है।





