नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल को प्रशासनिक बदलाव और नई कार्यसंस्कृति के संदर्भ में देखा जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार प्रेम शंकर झा के लेख के अनुसार, इस अवधि में नीति निर्माण के साथ उसके अंतिम स्तर तक क्रियान्वयन, तकनीक के इस्तेमाल, पारदर्शिता और कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच पर जोर दिखाई देता है।
10 जून 2026 को प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 4,399 दिन पूरे करने के साथ नरेंद्र मोदी ने लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पार किया। इसी अवधि में केंद्र में उनकी सरकार ने 12 वर्ष पूरे किए। लेख में कहा गया है कि लंबे शासनकाल का आकलन केवल कार्यकाल की अवधि से नहीं, बल्कि प्रशासन के काम करने के तरीके और राज्य तथा नागरिक के संबंधों में आए बदलाव से किया जाना चाहिए।
तकनीक और सीधे लाभ पर जोर
लेख के मुताबिक, जनधन खातों के विस्तार और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाओं ने सरकारी सहायता को लाभार्थियों तक पहुंचाने में तकनीक की भूमिका बढ़ाई। डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भी तेज विस्तार हुआ। अगस्त 2026 में यूपीआई पर 24,508.96 मिलियन लेनदेन दर्ज हुए, जिनका कुल मूल्य करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा।
निगरानी और परियोजनाओं की समीक्षा
प्रशासनिक निगरानी के स्तर पर प्रगति मंच को महत्वपूर्ण उदाहरण बताया गया है। इसके माध्यम से केंद्र और राज्यों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तथा लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाती है। जून 2026 में हुई 52वीं प्रगति बैठक में करीब 30 हजार करोड़ रुपये की चार आधारभूत परियोजनाओं की समीक्षा की गई।
पिछड़े क्षेत्रों पर भी फोकस
आकांक्षी जिलों और आकांक्षी ब्लॉकों की अवधारणा के जरिए विकास के आंकड़ों में पिछड़ रहे क्षेत्रों के प्रदर्शन पर विशेष ध्यान देने की कोशिश की गई। सीमावर्ती गांवों को भी विकास और संपर्क की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
हालांकि, लेख में यह भी रेखांकित किया गया है कि अगले चरण में प्रशासन के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। बुनियादी ढांचे के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्थानीय निकायों की क्षमता और नागरिक सेवाओं की समान पहुंच जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे।





