नई दिल्ली। कर्ज की किस्तें चूकने पर बैंक या वित्तीय कंपनियां अब मनमाने तरीके से वाहन जब्त नहीं कर सकतीं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वाहन की जब्ती निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और उचित नोटिस के तहत ही की जा सकती है। अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) में अपने दिशानिर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने यह फैसला एक ट्रक मालिक हरिदत्त शर्मा की याचिका पर सुनाया। मामले में शिकायत थी कि कर्ज की किस्तों में चूक के बाद उनका ट्रक बिना पूर्व सूचना के रात करीब एक बजे जब्त कर लिया गया। आरोप के मुताबिक, वाहन का स्टीयरिंग लॉक तोड़कर उसे ले जाया गया था।
सात दिन का नोटिस नहीं दिया गया
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि वाहन जब्त करने से पहले सात दिन का आवश्यक नोटिस नहीं दिया गया था। अदालत ने कहा कि वित्तीय संस्थानों को अपने संविदात्मक अधिकारों का इस्तेमाल करते समय RBI के दिशानिर्देशों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। कर्ज वसूली के लिए बल प्रयोग या अनुचित दबाव स्वीकार्य नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि वाहन जब्ती का अधिकार वित्तीय संस्थान को मिला हो, फिर भी इसका अर्थ यह नहीं है कि वह ताकत या गैरकानूनी तरीके से संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। कर्ज वसूली और वाहन की जब्ती कानूनी माध्यम से ही होनी चाहिए।
ट्रक मालिक को 10 लाख रुपये मुआवजा
मामले में कंपनी ने जब्त किए गए ट्रक को 4.50 लाख रुपये में बेच दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को दोनों ऋण खातों को बंद करने और वाहन की बिक्री से प्राप्त 4.50 लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक परेशानी और आजीविका प्रभावित होने के लिए ट्रक मालिक को 10 लाख रुपये मुआवजा तथा मुकदमे की लागत के रूप में 50 हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया।
RBI को प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि RBI के वाहन जब्ती और कर्ज वसूली संबंधी दिशानिर्देश केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। केंद्रीय बैंक को बैंकों और NBFC के स्तर पर इनके वास्तविक अनुपालन के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में बिना नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के किसी व्यक्ति की आजीविका का साधन न छीना जाए।





