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हूतियों के बढ़ते हमलों से सऊदी की चिंता बढ़ी, फ्रांस-ब्रिटेन-पाकिस्तान से मांगी हवाई रक्षा मदद

नई दिल्ली। यमन के हूती विद्रोहियों के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच सऊदी अरब ने अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम को लेकर सहयोगी देशों से मदद मांगी है। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, सऊदी अरब ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से हवाई रक्षा सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है। इसका उद्देश्य हूती और अन्य ईरान समर्थित समूहों की ओर से किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों से सऊदी क्षेत्र की सुरक्षा करना है।

अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अरब के पास मिसाइल इंटरसेप्टर की उपलब्धता कम हो रही है। इस बीच अमेरिका, जो सऊदी अरब का प्रमुख सहयोगी और हथियार आपूर्तिकर्ता है, ईरान के साथ चल रहे छह महीने के युद्ध के कारण खुद भी इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी का सामना कर रहा है।

हूतियों ने सऊदी F-15 गिराने का किया दावा

इसी बीच हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने यमन के मारीब प्रांत में सऊदी अरब के F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। हूती प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि विमान को स्थानीय रूप से निर्मित एयर-टू-एयर मिसाइल से निशाना बनाया गया। संगठन ने विमान के मलबे और आग लगने का वीडियो भी जारी किया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

मक्का पर ड्रोन हमले का आरोप

सऊदी अरब ने बुधवार को आरोप लगाया कि हूतियों ने पवित्र शहर मक्का को निशाना बनाकर ड्रोन हमला करने की कोशिश की। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, रॉयल सऊदी एयर डिफेंस ने ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया। हूतियों ने इस आरोप से इनकार किया है।

तेल और समुद्री सुरक्षा पर भी असर

हूती हमलों का असर सऊदी अरब के तेल ढांचे और लाल सागर में समुद्री यातायात पर भी पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी की एक महत्वपूर्ण पाइपलाइन हमले के बाद बंद है, जबकि लाल सागर और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।

इस बीच क्षेत्रीय देश सैन्य टकराव बढ़ाने के बजाय तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी कर रहे हैं। ओमान और मिस्र को इन प्रयासों में प्रमुख भूमिका निभाते हुए बताया गया है।

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