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छात्रसंघ चुनाव में 50% छात्रा आरक्षण पर मंथन, कुमाऊं विश्वविद्यालय की कार्य परिषद आज लेगी फैसला

हल्द्वानी। उत्तराखंड में छात्रसंघ चुनाव से पहले छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित करने के शासनादेश को लेकर कुमाऊं विश्वविद्यालय में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुक्रवार शाम कार्य परिषद की अहम बैठक बुलाई है। बैठक में यह तय किया जाएगा कि आरक्षण की व्यवस्था मौजूदा चुनाव में लागू होगी या अगले सत्र से।

प्रदेश सरकार ने छात्रसंघ चुनाव में छात्राओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का शासनादेश जारी किया है। इसके तहत पहले से छात्राओं के लिए आरक्षित उपाध्यक्ष पद के अलावा अन्य पदों में भी आरक्षण लागू किए जाने की तैयारी है। सरकार की ओर से यह व्यवस्था राज्य के राजकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय परिसरों में लागू करने की बात कही गई है।

कॉलेजों ने अगले सत्र से लागू करने की मांग की

कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध कई महाविद्यालयों ने इस वर्ष आरक्षण लागू करने पर आपत्ति जताई है। एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी, रुद्रपुर महाविद्यालय समेत अधिकांश कॉलेजों का कहना है कि चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बाद आरक्षण व्यवस्था में बदलाव करने से विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। इन कॉलेजों ने सत्र 2027-28 से 50 प्रतिशत छात्रा आरक्षण लागू करने का सुझाव दिया है।

विश्वविद्यालय ने शुक्रवार सुबह सभी संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ बैठक कर इस विषय पर चर्चा की। बैठक में कॉलेजों की ओर से मौजूदा चुनाव में आरक्षण लागू करने को लेकर संभावित दिक्कतों की जानकारी दी गई। अब कार्य परिषद की बैठक में इस पर निर्णय लिया जाना है।

29 सितंबर को प्रस्तावित हैं चुनाव

कुमाऊं विश्वविद्यालय के परिसरों में छात्रसंघ चुनाव 29 सितंबर 2026 को प्रस्तावित हैं। चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद से ही परिसरों में छात्र संगठनों और प्रत्याशियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

सरकार की ओर से छात्राओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने के पीछे उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की पर्याप्त भागीदारी का तर्क दिया गया है। अब निगाहें कुमाऊं विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के फैसले पर टिकी हैं। बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरक्षण इस चुनाव से लागू होगा या अगले शैक्षणिक सत्र से।

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