पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में खराब मौसम और भूस्खलन ने आदि कैलाश यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ा दीं। शुक्रवार को तवाघाट-गुंजी मार्ग पर भारी मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर गिरने से यातायात करीब आठ घंटे तक बाधित रहा। इससे आदि कैलाश जाने वाले यात्रियों के साथ स्थानीय लोग भी रास्ते में फंस गए। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश, बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
गस्कू और मलघाट में बंद हुआ मार्ग
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार तड़के करीब पांच बजे गस्कू और मलघाट के पास भूस्खलन होने से सड़क पर भारी मलबा जमा हो गया। इसके चलते आदि कैलाश जाने और गुंजी की ओर से लौटने वाले यात्रियों की आवाजाही रुक गई।
सूचना मिलने पर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की टीम और पुलिस मौके पर पहुंची। सड़क से मलबा और बोल्डर हटाने का काम शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद गस्कू में सुबह करीब 9:30 बजे और मलघाट में दोपहर 12:45 बजे यातायात बहाल हो सका। इसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली।
ऊंची चोटियों पर बर्फबारी, तापमान में गिरावट
पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम बिगड़ने से ठंड बढ़ गई है। आदि कैलाश क्षेत्र, कुटी और नावीढांग सहित ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई। काली और गोरी नदी घाटियों में ओलावृष्टि और बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ।
खराब मौसम का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा। सीमित दृश्यता और बारिश के कारण पिथौरागढ़ की विमान और हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रभावित रहीं।
अन्य सड़कों पर भी यातायात प्रभावित
भूस्खलन के कारण थल-मुनस्यारी राज्य राजमार्ग भी बनिक के पास बंद हो गया था। हालांकि, लोक निर्माण विभाग की टीम ने करीब एक घंटे में मार्ग खोल दिया। डीडीहाट-थल सड़क पर पेड़ गिरने से भी लगभग दो घंटे यातायात बाधित रहा। जिले के कुछ ग्रामीण मोटर मार्गों पर आवाजाही ठप रहने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गई।
प्रशासन ने सतर्क रहने की अपील की
लगातार बदलते मौसम और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। यात्रियों को मौसम की स्थिति और सड़क मार्ग की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है।
प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध यातायात सुनिश्चित करना है।





