हरिद्वार: अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने का बड़ा उद्घोष किया है। हरिद्वार प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार उत्तराखंड को ‘विश्व की आध्यात्मिक राजधानी’ के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस दौरान उन्होंने श्री अखंड परमधाम के नवनिर्मित गंगा घाट का लोकार्पण किया और संतों के सानिध्य में प्रदेश की उन्नति का आशीर्वाद लिया।
स्वामी परमानंद गिरि की संन्यास जयंती पर संतों का समागम
मुख्यमंत्री ने स्वामी परमानंद गिरि महाराज की 71वीं संन्यास जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर देशभर से आए प्रबुद्ध संत-महात्माओं का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
- साधना की मिसाल: स्वामी परमानंद गिरि महाराज का जीवन तप, त्याग और अखंड साधना का अनुपम उदाहरण है। उनके विचारों ने समाज को केवल करुणा ही नहीं, बल्कि मानव कल्याण और निस्वार्थ सेवा के मार्ग पर चलना सिखाया है।
- साध्वी ऋतंभरा का वंदन: सीएम धामी ने वात्सल्य ग्राम की संस्थापिका साध्वी ऋतंभरा के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और सनातन संस्कृति के प्रति उनका समर्पण प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणा का जीवंत स्रोत है।
सनातन विरासत और प्रधानमंत्री का विजन
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के सांस्कृतिक प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर खोया हुआ गौरव वापस मिल रहा है।
- सांस्कृतिक मील के पत्थर: अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण, बाबा केदारनाथ और बदरीनाथ धाम का भव्य मास्टर प्लान के तहत पुनर्निर्माण, और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं आधुनिक भारत के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई हैं।
- आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकास: सीएम ने कहा कि चारधाम यात्रा और ऋषिकेश-हरिद्वार के कॉरिडोर विकास के माध्यम से उत्तराखंड जल्द ही दुनिया भर के साधकों और पर्यटकों के लिए श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा।
भविष्य की कार्ययोजना पर जोर
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार केवल बुनियादी ढांचे का विकास नहीं कर रही, बल्कि अपनी पौराणिक संस्कृति और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है। अक्षय तृतीया पर गंगा घाट के लोकार्पण को उन्होंने एक शुभ संकेत बताते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक प्रकल्पों से आने वाली पीढ़ियों को सनातन मूल्यों को समझने में मदद मिलेगी।





