अल्मोड़ा: उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में चंद शासकों की ऐतिहासिक विरासत ‘मल्ला महल’ अब अपने नए और भव्य स्वरूप में पर्यटकों का स्वागत करने के लिए तैयार है। लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रही इस धरोहर को संरक्षित और संवारने का कार्य अब अंतिम चरणों में है। प्रदेश सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य मल्ला महल को केवल एक ऐतिहासिक इमारत तक सीमित न रखकर, इसे कुमाऊं की संस्कृति और परंपराओं के एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
लाखों की लागत से हुआ कायाकल्प और सौंदर्यीकरण
मल्ला महल के संरक्षण और इसे पर्यटन मानचित्र पर उभारने के लिए सरकार ने बजट का खुला प्रावधान किया है:
- सौंदर्यीकरण: पर्यटन विभाग ने इस महल के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पर लगभग 11 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
- आधुनिक लेजर शो: जिला प्रशासन ने 2 करोड़ रुपये की लागत से यहाँ एक आधुनिक ‘लेजर लाइट शो प्रोजेक्टर प्रणाली’ स्थापित की है। इसके माध्यम से पर्यटक मल्ला महल के गौरवशाली इतिहास, चंद राजाओं के शासनकाल और कुमाऊं की अनूठी परंपराओं को डिजिटल रूप में देख सकेंगे।
लोक विरासत संग्रहालय: पुरानी स्मृतियों का संरक्षण
संस्कृति विभाग, जिसे अब इस परिसर की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है, यहाँ एक विशाल ‘लोक विरासत संग्रहालय’ तैयार कर रहा है।
- ऐतिहासिक वस्तुएं: इस संग्रहालय में प्राचीन पांडुलिपियां, लकड़ी के पारंपरिक बर्तन, ताम्रपत्र, ऐतिहासिक सिक्के और कुमाऊंनी आभूषणों को सहेजा जाएगा।
- जन-भागीदारी की अपील: विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि उनके पास कोई प्राचीन धरोहर सुरक्षित है, तो वे उसे संग्रहालय को दान कर सकते हैं। ऐसे दानदाताओं का नाम संग्रहालय में अंकित किया जाएगा और उन्हें विशेष रूप से सम्मानित भी किया जाएगा।
- मूर्तिकला का प्रदर्शन: विभिन्न मंदिरों में वर्षों से संरक्षित खंडित मूर्तियों को भी यहाँ स्थान दिया जाएगा, ताकि शोधार्थी और पर्यटक इनकी कलात्मक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझ सकें।
तीन हिस्सों में बंटा है परिसर, पर्यटकों की बढ़ी आवाजाही
मल्ला महल परिसर को मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण भागों में विभाजित किया गया है, जिनमें रानी महल, मल्ला महल और राम-सीता मंदिर शामिल हैं।
- टिकट और समय सीमा: व्यवस्था बनाए रखने के लिए संस्कृति विभाग ने 10 रुपये का नाममात्र प्रवेश शुल्क निर्धारित किया है। पर्यटकों के भ्रमण के लिए एक निश्चित समय सारिणी भी तय की गई है।
- पर्यटकों का उत्साह: वर्तमान में प्रतिदिन 50 से अधिक पर्यटक यहाँ पहुँच रहे हैं। स्थानीय प्रशासन को उम्मीद है कि संग्रहालय पूरी तरह क्रियाशील होने के बाद यह संख्या कई गुना बढ़ जाएगी।
शोधार्थियों और पर्यटन के लिए मील का पत्थर
मल्ला महल का यह नया स्वरूप न केवल स्थानीय पर्यटन को नई ऊंचाइयां देगा, बल्कि इतिहास के छात्रों और शोधार्थियों के लिए भी एक ज्ञान केंद्र साबित होगा। स्थानीय इतिहास और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में इसे उत्तराखंड सरकार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कुमाऊं की इस अनमोल विरासत के संरक्षण से आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ सकेंगी।





