दुबई/तेहरान: पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजर रहे कुछ वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाते हुए उन पर भारी गोलाबारी की है। इस घटना ने पहले से ही अशांत खाड़ी क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडराने लगा है।
समुद्र के बीच मची अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों और अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्थाओं के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब कुछ अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाज सामान्य व्यापारिक रूट से गुजर रहे थे।
- अचानक हमला: ईरानी नौसेना की गश्ती नौकाओं ने कथित तौर पर जहाजों को रुकने की चेतावनी दी और इसके तुरंत बाद उन पर फायरिंग शुरू कर दी।
- जहाजों को क्षति: गोलाबारी के कारण कम से कम दो जहाजों के ऊपरी हिस्से को नुकसान पहुँचने की खबरें हैं। हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान का रुख: ‘चेतावनी को नजरअंदाज किया’
तेहरान की ओर से इस कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया सूत्रों का दावा है कि ये जहाज ईरानी जलसीमा के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे।
- सुरक्षा का हवाला: सूत्रों का कहना है कि संदिग्ध गतिविधियों और बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज करने के कारण सुरक्षा बलों को बल प्रयोग करना पड़ा।
- तनाव की पृष्ठभूमि: यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान ने हाल ही में पश्चिमी देशों को इस क्षेत्र में हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी थी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और सुरक्षा अलर्ट
इस हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेना के बेड़े हाई-अलर्ट पर आ गए हैं।
- नेवी का हस्तक्षेप: अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) ने कहा है कि वह स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और संकटग्रस्त जहाजों की सहायता के लिए संचार बनाए हुए है।
- व्यापारिक जगत में डर: इस गोलाबारी के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के बीमा प्रीमियम में भारी उछाल आने की संभावना है। कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों को वैकल्पिक मार्ग चुनने या सुरक्षित बंदरगाहों पर रुकने के निर्देश दिए हैं।
भारत के लिए चिंता का विषय
होर्मुज जलडमरूमध्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जीवन रेखा के समान है। भारत अपनी तेल और गैस की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से प्राप्त करता है। हालांकि, हाल ही में 10 भारतीय जहाज यहाँ से सुरक्षित निकले हैं, लेकिन ताजा गोलाबारी ने भारतीय शिपिंग मंत्रालय और नौसेना की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय नौसेना का ‘ऑपरेशन संकल्प’ अब क्षेत्र में और अधिक सक्रिय हो गया है ताकि भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वैश्विक तेल बाजार पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में इस तरह की हिंसक घटनाएं जारी रहती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 5% से 10% तक का उछाल आ सकता है। यह जलमार्ग दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा नियंत्रित करता है, इसलिए यहाँ होने वाली छोटी सी भी हलचल वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकती है।




