दुबई/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य तनाव और समुद्री संघर्ष के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत सामने आई है। जहाँ एक ओर ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनातनी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले पश्चिमी जहाजों पर हमले का खतरा मंडरा रहा है, वहीं भारत के व्यापारिक जहाजों के लिए यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित बना हुआ है। शनिवार को भारत का 10वां वाणिज्यिक जहाज बिना किसी बाधा के इस संवेदनशील जलडमरूमध्य को पार कर गया, जो वैश्विक समुद्री व्यापार में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
दुनिया का सबसे संवेदनशील रास्ता और भारत की ‘सॉफ्ट पावर’
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण गलियारा है। वर्तमान हालातों में ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी और इजरायली झंडे वाले या उनसे जुड़े जहाजों को यहाँ से गुजरने नहीं देगा। इसके विपरीत, भारत के साथ ईरान के प्रगाढ़ संबंधों का लाभ भारतीय शिपिंग कंपनियों को मिल रहा है।
- सुरक्षित गलियारा: पिछले कुछ हफ्तों में यह 10वां अवसर है जब भारतीय ध्वज वाला जहाज बिना किसी सुरक्षा संकट के इस रास्ते से गुजरा है।
- निरंतर निगरानी: भारतीय नौसेना के युद्धपोत ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत इन जहाजों की दूर से निगरानी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप या धमकी का सामना नहीं करना पड़ा है।
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कूटनीतिक संतुलन
ईरान ने हाल के दिनों में कई पश्चिमी जहाजों को जब्त किया है, जिससे इस क्षेत्र में मालभाड़ा और बीमा की दरें आसमान छू रही हैं। हालांकि, भारत के लिए परिस्थितियां अलग हैं:
- तटस्थ भूमिका: भारत ने पश्चिम एशिया के संघर्ष में एक संतुलित और तटस्थ रुख अपनाया है। यही कारण है कि ईरान की ओर से भारतीय व्यापारिक जहाजों को ‘सेफ पैसेज’ (सुरक्षित रास्ता) दिया जा रहा है।
- रणनीतिक स्वायत्तता: विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से तेल खरीद और ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह जैसे प्रोजेक्ट्स ने भारत की साख इस क्षेत्र में इतनी बढ़ा दी है कि कोई भी पक्ष भारतीय हितों को चोट पहुँचाने का जोखिम नहीं लेना चाहता।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत
होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों का सुरक्षित निकलना देश की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी के समान है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से प्राप्त करता है।
- सस्ती आपूर्ति: यदि यह रास्ता बंद होता है, तो भारत को अफ्रीका के चारों ओर से घूमकर (केप ऑफ गुड होप के रास्ते) आना पड़ेगा, जिससे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
- व्यापारिक निरंतरता: 10वें जहाज की सफल आवाजाही यह सुनिश्चित करती है कि भारत की सप्लाई चेन फिलहाल सुरक्षित है।





