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अधिकारियों की मनमानी पर बिफरे सीएम धामी: बिना समाधान बंद कीं 22 हजार शिकायतें; मुख्यमंत्री ने दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

देहरादून: उत्तराखंड के प्रशासनिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जन शिकायतों के निस्तारण में भारी लापरवाही पकड़ी। मुख्यमंत्री ने पाया कि अधिकारियों ने बिना किसी वास्तविक समाधान के ही जनता की हजारों शिकायतों को ‘जबरन’ फाइलों में दफन कर दिया। ‘सीएम हेल्पलाइन 1905’ की समीक्षा बैठक के दौरान जब चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए, तो मुख्यमंत्री का पारा चढ़ गया और उन्होंने लापरवाह अफसरों को अंतिम चेतावनी जारी कर दी।

आंकड़ों ने खोली व्यवस्था की पोल

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के सामने यह तथ्य आया कि प्रदेश भर के विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने 22,246 शिकायतों को ‘फोर्स्ड क्लोज’ (जबरन बंद) श्रेणी में डाल दिया है।

  • क्या है मामला: इन शिकायतों पर या तो कोई कार्रवाई नहीं की गई या फिर शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बिना ही उन्हें पोर्टल पर ‘निस्तारित’ दिखा दिया गया।
  • सीएम की नाराजगी: मुख्यमंत्री ने इसे जनता के साथ विश्वासघात और सरकार की छवि खराब करने वाला कृत्य करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी रूप से आंकड़ों को सुधारने के लिए शिकायतों को बंद करना स्वीकार्य नहीं है।

“जबरन बंद की शिकायत तो नपेंगे अफसर”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में मौजूद सभी विभागाध्यक्षों और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए। उन्होंने कहा:

  1. जवाबदेही तय: यदि किसी अधिकारी ने बिना ठोस कारण या बिना समाधान के किसी भी शिकायत को जबरन बंद किया, तो उसके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
  2. गुणवत्ता पर जोर: अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे केवल आंकड़ों के जाल में न उलझें, बल्कि यह सुनिश्चित करें कि शिकायतकर्ता अपनी समस्या के समाधान से पूरी तरह संतुष्ट है या नहीं।
  3. फीडबैक तंत्र: मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन टीम को आदेश दिया कि वे ‘फोर्स्ड क्लोज’ की गई शिकायतों का रैंडम वेरिफिकेशन करें और सीधे जनता से फीडबैक लें।

जनता की शिकायतों के प्रति संवेदनशील बनें विभाग

सीएम धामी ने कहा कि ‘1905 सीएम हेल्पलाइन’ सरकार और जनता के बीच सीधा सेतु है। उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें और उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पर मजबूर न करें। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि शिकायतों के निस्तारण में कोताही बरतने वाले अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में भी इसका उल्लेख किया जाएगा।

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