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भारत की दो टूक: ‘परिसीमन हमारा आंतरिक मामला, पाकिस्तान की दखलंदाजी मंजूर नहीं’; शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर भी दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी संप्रभुता और आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान द्वारा भारत की परिसीमन प्रक्रिया पर की गई टिप्पणियों को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत के भीतर होने वाली कोई भी संवैधानिक या विधायी प्रक्रिया पूरी तरह से उसका निजी मामला है और इसमें किसी अन्य देश का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।

परिसीमन पर पाकिस्तान के दावों को किया ध्वस्त

हाल ही में पाकिस्तान ने भारत के ‘परिसीमन विधेयक-2026’ को लेकर आपत्ति जताई थी। दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि यह विधेयक पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

  • पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: इस्लामाबाद ने इस प्रक्रिया को ‘अवैध’ और ‘कानूनी रूप से महत्वहीन’ बताया था।
  • भारत का कड़ा जवाब: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि भारत अपने आंतरिक मामलों में किसी भी विदेशी टिप्पणी को पूरी तरह खारिज करता है। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहां की प्रशासनिक व्यवस्थाएं भारत का संप्रभु अधिकार हैं।

शेख हसीना के प्रत्यर्पण अनुरोध की समीक्षा जारी

प्रेस वार्ता के दौरान प्रवक्ता ने बांग्लादेश के साथ जारी कूटनीतिक हलचल पर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

  • औपचारिक अनुरोध: रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि भारत को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए बांग्लादेश सरकार की ओर से कानूनी और न्यायिक चैनलों के माध्यम से एक औपचारिक अनुरोध प्राप्त हुआ है।
  • भारत का रुख: भारत इस समय इस अनुरोध की कानूनी बारीकियों और मौजूदा संधि शर्तों के आधार पर गहन समीक्षा कर रहा है। जायसवाल ने कहा कि क्षेत्रीय कूटनीति और कानूनी दायित्वों के बीच संतुलन बनाते हुए इस विषय पर उचित कदम उठाए जाएंगे।

COP-33 की मेजबानी से पीछे हटा भारत

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मोर्चे से भी एक बड़ी खबर सामने आई है। समाचार एजेंसी रॉयटर के हवाले से बताया गया कि भारत ने साल 2028 में होने वाले संयुक्त राष्ट्र वार्षिक जलवायु सम्मेलन (COP-33) की मेजबानी के लिए दिया गया अपना प्रस्ताव वापस ले लिया है।

  • सरकारी पुष्टि: सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भारत ने इस महीने औपचारिक रूप से अपने प्रस्ताव को वापस लेने की जानकारी दी है। हालांकि, इसके पीछे के स्पष्ट कारणों का अभी खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इसे वैश्विक जलवायु कूटनीति में भारत की बदलती प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा पर ध्यान

विदेश मंत्रालय के बयानों से यह स्पष्ट है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में जहां एक ओर सहयोग और कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी सुरक्षा और अखंडता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार के ‘दुष्प्रचार’ का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की यह सक्रियता अपनी वैश्विक छवि और राष्ट्रीय हितों को संतुलित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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