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पीएम मोदी की अध्यक्षता में आज CCS और कैबिनेट की अहम बैठक: राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक संकट पर होंगे बड़े फैसले

नई दिल्ली: देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राजधानी दिल्ली में ‘कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी’ (CCS) की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। सुबह 11:30 बजे प्रस्तावित इस बैठक में देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के वर्तमान हालातों की गहन समीक्षा की जाएगी। सुरक्षा समिति की बैठक के ठीक बाद प्रधानमंत्री आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) और केंद्रीय कैबिनेट की बैठक को भी संबोधित करेंगे, जिसमें कई बड़े नीतिगत फैसलों पर मुहर लग सकती है।

वैश्विक संघर्ष और भारत पर प्रभाव

यह बैठक एक ऐसे नाजुक समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे युद्ध और अस्थिरता ने दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

  • सुरक्षा समीक्षा: प्रधानमंत्री मोदी और सीसीएस के सदस्य पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से भारत की सामरिक स्थिति पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करेंगे।
  • सतत निगरानी: इससे पहले भी 1 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने सुरक्षा समिति की विशेष बैठक की थी, जिसमें संकट की स्थिति में भारत की आगामी रणनीतियों और पहलों पर विस्तृत चर्चा की गई थी।

आर्थिक और खाद्य सुरक्षा पर विशेष जोर

कैबिनेट बैठक में केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने पर भी मंथन होगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक अस्थिरता का असर आम नागरिक की जरूरतों पर न पड़े।

  • कोयला और बिजली भंडार: सरकारी सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि देश में वर्तमान में कोयले का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। सरकार ने किसी भी आपात स्थिति के लिए वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था भी सुनिश्चित की है, ताकि देश में बिजली संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
  • खाद्य सुरक्षा: बैठक में देश की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत करने और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने पर भी महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है।

संसद में कैबिनेट की गूँज

प्रधानमंत्री संसद भवन परिसर में होने वाली इन बैठकों के दौरान मंत्रियों को संबोधित करते हुए आगामी विधायी कार्यों और देश के आर्थिक रोडमैप पर दिशा-निर्देश जारी करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बनाए रखने के लिए आवश्यक निवेश पर भी बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।

अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और संबंधित मंत्रालयों को पहले ही हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि वैश्विक घटनाक्रमों पर पल-पल की नजर रखी जा सके। सुरक्षा और आर्थिक मामलों की इन बैक-टू-बैक बैठकों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि भारत सरकार किसी भी वैश्विक चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और देश की सुरक्षा के साथ-साथ विकास की रफ्तार को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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