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नासिक विवाद पर TCS की सफाई: ‘निदा खान HR हेड नहीं, कंपनी को अब तक नहीं मिली कोई आंतरिक शिकायत’

नासिक/मुंबई: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अपनी नासिक इकाई में धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बीच अपनी चुप्पी तोड़ी है। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कंपनी ने स्पष्ट किया कि उन्हें अभी तक इस मामले से संबंधित कोई भी शिकायत अपने आंतरिक शिकायत तंत्र (Internal Complaint Mechanism) के माध्यम से प्राप्त नहीं हुई है। इसके साथ ही, कंपनी ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति के गठन की भी घोषणा की है।

केकी मिस्त्री करेंगे निगरानी समिति की अध्यक्षता

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए टीसीएस ने अपनी आंतरिक जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए बाहरी संस्थाओं और स्वतंत्र निदेशकों को शामिल करने का निर्णय लिया है:

  • निगरानी समिति: कंपनी के निदेशक मंडल के स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री इस विशेष निगरानी समिति की अध्यक्षता करेंगे।
  • आंतरिक जांच: कंपनी की मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) आरती सुब्रमण्यन के नेतृत्व में एक विस्तृत आंतरिक जांच की जा रही है।
  • समीक्षा प्रक्रिया: जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे केकी मिस्त्री की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष पेश किया जाएगा, जो रिपोर्ट की समीक्षा करेगी और आवश्यक सिफारिशों को लागू करने का कार्य करेगी।

निदा खान के पद को लेकर कंपनी का बड़ा खुलासा

सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्टों में ‘निदा खान’ नामक कर्मचारी को एचआर हेड (HR Head) बताए जाने पर कंपनी ने स्थिति स्पष्ट की है:

  • पद का स्पष्टीकरण: कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कहा कि निदा खान टीसीएस में कोई एचआर मैनेजर या नेतृत्व वाली भूमिका में नहीं हैं।
  • प्रोसेस एसोसिएट: वह कंपनी में एक ‘प्रोसेस एसोसिएट’ के रूप में कार्यरत हैं और उनके पास कभी भी किसी विभाग का नेतृत्व करने का दायित्व नहीं रहा है। कंपनी ने इन दावों को खारिज किया कि वह किसी प्रभावशाली पद पर आसीन थीं।

पुलिस जांच और कंपनी का सहयोग

नासिक पुलिस इस समय धर्मांतरण और उत्पीड़न के आरोपों की गहनता से जांच कर रही है। टीसीएस प्रबंधन ने कहा है कि वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है। कंपनी ने दोहराया कि उनके यहाँ कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या अनैतिक गतिविधियों के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) की नीति है।

कर्मचारियों की सुरक्षा पर जोर

टीसीएस ने अपने बयान में विश्वास दिलाया कि कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित और समावेशी कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। बाहरी संस्थाओं को जांच में शामिल करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पक्षपात न हो और वास्तविकता जनता के सामने आए। फिलहाल, कंपनी के इस स्पष्टीकरण के बाद अब सबकी नजरें पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट और केकी मिस्त्री समिति के निष्कर्षों पर टिकी हैं।

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