नई दिल्ली: आधुनिक युद्धों के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारतीय वायुसेना (IAF) ने अपनी युद्धक क्षमताओं को क्रांतिकारी रूप से बढ़ाने का निर्णय लिया है। वायुसेना अब अपने हेलीकॉप्टरों और मालवाहक (Transport) विमानों को ड्रोन लॉन्चिंग पैड के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। इस ‘एडवांस स्ट्रेटजी’ के तहत हवा में ही विमानों से ड्रोन और ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ (आत्मघाती ड्रोन) छोड़े जाएंगे, जो दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने के साथ-साथ जासूसी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में भी सक्षम होंगे।
‘वायु बाण’: भारत का पहला हेलीकॉप्टर-लॉन्च ड्रोन प्रोजेक्ट
वायुसेना ने स्वदेशी स्तर पर ‘वायु बाण’ (Vayu Baan) नामक एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है। यह भारत का पहला ऐसा सिस्टम होगा जिसमें हेलीकॉप्टर से हवा में ही ड्रोन तैनात किए जा सकेंगे।
- रेंज और मारक क्षमता: इस ड्रोन की रेंज 50 किलोमीटर से अधिक होगी और यह लगभग 30 मिनट तक हवा में रहकर दुश्मन की टोह ले सकेगा।
- सटीक निशाना: यह ड्रोन इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर से लैस होगा, जो दिन और रात दोनों समय हाई-डेफिनिशन वीडियो फीड भेज सकेगा। जरूरत पड़ने पर यह ‘कामीकाजे’ (आत्मघाती) मोड में जाकर दुश्मन के ठिकानों को नष्ट कर देगा।
- जैमिंग प्रूफ तकनीक: ‘वायु बाण’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह GNSS-Denied (जीपीएस जाम होने की स्थिति) वातावरण में भी पूरी सटीकता से काम कर सकेगा।
मालवाहक विमानों से ‘ड्रोन स्वार्म’ का प्रहार
वायुसेना केवल हेलीकॉप्टर ही नहीं, बल्कि अपने विशाल मालवाहक विमानों का उपयोग भी ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ छोड़ने के लिए करेगी।
- लंबी दूरी की मार: मालवाहक विमानों से छोड़े जाने वाले ड्रोनों की रेंज लगभग 500 किलोमीटर तक हो सकती है। ये ड्रोन करीब 30 किलोग्राम का वारहेड (विस्फोटक) ले जाने और 400 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ने में सक्षम होंगे।
- दुश्मन का रडार होगा नाकाम: इन ड्रोनों का उपयोग दुश्मन के वायु रक्षा तंत्र (Air Defence) को भ्रमित करने के लिए ‘डिकॉय’ (छलावे) के रूप में भी किया जा सकता है, जिससे भारतीय लड़ाकू विमानों के लिए रास्ता साफ हो जाएगा।
फाइटर जेट्स पर कम होगा दबाव
वायुसेना की इस रणनीति का एक मुख्य उद्देश्य अपने लड़ाकू विमानों (Fighter Fleet) के कार्यभार को कम करना है।
- भूमिका विस्तार: वर्तमान में स्ट्राइक और टोही मिशनों के लिए मुख्य रूप से फाइटर जेट्स का उपयोग होता है। अब ये कार्य सस्ते और रिस्क-फ्री ड्रोनों के जरिए किए जा सकेंगे।
- मैंड-अनमैंड टीमिंग (MUM-T): यह तकनीक मानव रहित और मानव युक्त विमानों के बीच एक तालमेल बिठाएगी, जिससे पायलट सुरक्षित दूरी से ही दुश्मन पर बड़ा प्रहार कर सकेंगे।
वैश्विक शक्तियों की कतार में भारत
हवा से ड्रोन लॉन्च करने की क्षमता विकसित कर भारत उन चुनिंदा देशों (जैसे अमेरिका, चीन और रूस) के समूह में शामिल हो जाएगा जो ‘एयर लॉन्च्ड इफेक्ट्स’ (ALE) तकनीक का उपयोग करते हैं। अमेरिका का ‘ग्रैमलिन’ और चीन का ‘स्वार्म’ प्रोग्राम इसी दिशा में काम कर रहे हैं।





