वाशिंगटन/नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक गलियारों में मचे घमासान के बीच अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा यू-टर्न लिया है। शुक्रवार को अमेरिकी प्रशासन ने रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद पर प्रतिबंधों में दी गई छूट को फिर से बहाल कर दिया है। यह फैसला उन देशों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर हैं। विशेष रूप से भारत जैसे देशों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, जो रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीद रहे हैं।
नीति में अचानक बदलाव और नया लाइसेंस
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने शुक्रवार देर रात अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक नया लाइसेंस जारी किया। इस फैसले की सबसे खास बात इसकी टाइमिंग है:
- अचानक फैसला: महज दो दिन पहले ही अमेरिकी प्रशासन ने इस छूट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था, लेकिन शुक्रवार को फिर से इसे लागू कर दिया गया।
- समय सीमा: यह नई छूट लगभग एक महीने के लिए दी गई है। इसके तहत, शुक्रवार तक जहाजों पर लादे गए रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को 16 मई तक खरीदने और उनके भुगतान की अनुमति दी गई है।
भारत पर नहीं पड़ेगा असर: तेहरान का रुख साफ
अमेरिकी प्रतिबंधों और छूट के इस खेल के बीच भारत ने अपना रुख बेहद स्पष्ट और मजबूत रखा है। सरकारी सूत्रों और रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार:
- खरीद जारी रहेगी: भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों या छूट में होने वाले बदलावों से प्रभावित नहीं होगा।
- राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को देखते हुए रूस से कच्चा तेल और एलपीजी (LPG) खरीदना जारी रखेगा। भारत के लिए रूस न केवल एक किफायती ऊर्जा स्रोत है, बल्कि एक भरोसेमंद साझेदार भी बना हुआ है।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल
दो दिनों के भीतर फैसले को बदलने की अमेरिकी नीति ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है। माना जा रहा है कि वैश्विक तेल कीमतों में संभावित उछाल और मित्र देशों के दबाव के कारण ट्रंप प्रशासन को यह लचीला रुख अपनाना पड़ा है। यदि यह छूट नहीं दी जाती, तो समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल के जहाजों की डिलीवरी रुक सकती थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का संकट पैदा हो जाता।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव
अमेरिका द्वारा दी गई इस एक महीने की मोहलत से वैश्विक रिफाइनरियों और तेल कंपनियों को अपना ट्रांजैक्शन पूरा करने का समय मिल गया है। हालांकि, यह छूट केवल 16 मई तक के लिए है, जिससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में अमेरिका रूसी ऊर्जा निर्यात पर और अधिक सख्ती बरत सकता है। भारत वर्तमान में रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है, और इस नई छूट से भारतीय तेल कंपनियों को अपने पुराने ऑर्डर्स को बिना किसी बाधा के सुरक्षित तरीके से प्राप्त करने में मदद मिलेगी।





