नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) में ढांचागत सुधारों के लिए गठित नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाले उच्चाधिकार प्राप्त पैनल की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी। सरकार के अनुसार, पैनल ने सुधारों से जुड़े व्यापक विचार-विमर्श पूरे कर लिए हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ को बताया कि सुधारों से संबंधित सभी सुझाव पैनल के सामने रखे जा चुके हैं। पैनल ने पूर्व इसरो अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पिछली समिति के सदस्यों के साथ भी चर्चा की है।
स्थायी व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट का जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने NEET की पूरी प्रक्रिया को संस्थागत और स्थायी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। पीठ ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था के लिए स्थायी ढांचा, स्थायी कर्मचारी और समर्पित विभाग होने चाहिए तथा प्रतिनियुक्ति पर निर्भरता कम होनी चाहिए।
अदालत ने नीलेकणि पैनल की सहायता कर रहे कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के संयुक्त सचिव को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया। इसमें अब तक उठाए गए कदमों और सुधारों की प्रगति का विवरण देने को कहा गया है।
NTA की नई व्यवस्था का निरीक्षण करेंगे जज
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि वह और न्यायमूर्ति अराधे राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की नई और अपग्रेड की गई सुविधा का दौरा कर वहां लागू व्यवस्था का जायजा लेना चाहते हैं। सरकार की ओर से बताया गया कि नया अपग्रेडेड सिस्टम तैयार है, हालांकि मानव संसाधन की व्यवस्था अभी पूरी तरह नहीं हो पाई है।
इससे पहले 19 अगस्त को भी सुप्रीम कोर्ट ने NTA में सुधारों को संस्थागत रूप देने पर जोर दिया था और केंद्र से राधाकृष्णन समिति तथा नीलेकणि पैनल की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी।
NEET से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अब अदालत की नजर सुधार प्रक्रिया की प्रगति और परीक्षा प्रणाली को अधिक स्थायी बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर है।





