इस्लामाबाद: पश्चिम एशिया में युद्ध के मंडराते बादलों के बीच कूटनीतिक गलियारों से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध को समाप्त करने के लिए एक बार फिर बातचीत का मंच तैयार हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से ‘पीस टॉक्स 2.0’ (शांति वार्ता का दूसरा चरण) आगामी सोमवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होने की प्रबल संभावना है।
रविवार को जुटेंगे दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बेहद संवेदनशील वार्ता के लिए अमेरिका और ईरान के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल रविवार को ही इस्लामाबाद पहुँच सकते हैं। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच सैन्य और परमाणु मुद्दों पर बयानबाजी चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बैठक को क्षेत्र में शांति बहाली की आखिरी बड़ी उम्मीद के तौर पर देख रहा है।
मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका
इस कूटनीतिक हलचल के केंद्र में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ बनकर उभरा है। इस दिशा में हाल ही में कई बड़े घटनाक्रम हुए हैं:
- शीर्ष नेताओं का संवाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अंटाल्या डिप्लोमेसी फोरम के इतर कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन से मुलाकात की। इन नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहन विचार-विमर्श किया और शांति बहाली के लिए पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
- सैन्य कूटनीति: पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने तेहरान में ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ से विशेष मुलाकात की। माना जा रहा है कि जनरल मुनीर की यह यात्रा सोमवार को होने वाली संभावित वार्ता की रूपरेखा और विश्वास बहाली के लिए जमीन तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी।
वार्ता के मुख्य बिंदु और चुनौतियां
विशेषज्ञों के अनुसार, इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा हो सकती है:
- सैन्य तनाव कम करना: सीजफायर की शर्तों और क्षेत्र में तैनात सेनाओं के बीच टकराव टालने पर सहमति बनाना।
- परमाणु कार्यक्रम: ईरान के परमाणु संवर्धन अधिकारों और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर बीच का रास्ता निकालना।
- कैदियों की अदला-बदली: दोनों देशों के बीच लंबित सुरक्षा चिंताओं और कैदियों के मुद्दों पर बातचीत।
वैश्विक नजरें इस्लामाबाद पर
अंटाल्या डिप्लोमेसी फोरम में जुटे वैश्विक नेताओं ने भी यह माना है कि अमेरिका और ईरान का एक मेज पर आना ही तनाव कम करने की दिशा में बड़ी सफलता है। यदि सोमवार को होने वाली यह ‘पीस टॉक्स 2.0’ सफल रहती है, तो यह न केवल पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार के लिए भी सुखद संकेत होगा। फिलहाल, इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पूरी दुनिया की निगाहें सोमवार को होने वाली इस महा-बैठक के नतीजों पर टिकी हैं।




