देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी में साइबर अपराधियों ने ठगी की एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। इस बार ठगों ने तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को अपना निशाना बनाते हुए उनसे 1.87 करोड़ रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। आरोपियों ने बुजुर्ग अधिकारी को शेयर बाजार में भारी निवेश और उससे होने वाले मोटे मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाया था। पीड़ित की शिकायत के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए बिछाया गया जाल
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 70 वर्षीय दिलीप कुमार श्रीवास्तव, जो वर्ष 2016 में ओएनजीसी से रिटायर हुए थे, को डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर सुनियोजित तरीके से ठगा गया।
- शुरुआत: ठगी का सिलसिला बीती 31 जनवरी को शुरू हुआ, जब पीड़ित के मोबाइल पर निवेश योजना से संबंधित एक लुभावना संदेश आया।
- फर्जी सलाहकार: इसके बाद ‘दीया मेहरा’ नामक एक महिला ने खुद को निवेश सलाहकार बताते हुए उनसे संपर्क किया। उसने दिलीप कुमार को ‘एबीएसएल द ग्रुप ऑफ विजडम’ नामक एक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल कर लिया।
भरोसा जीतने के लिए अपनाई गई तकनीक
ठगों ने पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर ट्रेडिंग से जुड़े फर्जी स्क्रीनशॉट, बाजार के अपडेट और ग्रुप के अन्य कथित सदस्यों की भारी कमाई के आंकड़े साझा किए। लगातार मिल रहे मुनाफे के इन फर्जी सबूतों को देखकर बुजुर्ग अधिकारी झांसे में आ गए और उन्होंने भारी मुनाफा कमाने की उम्मीद में निवेश करना शुरू कर दिया।
1.87 करोड़ रुपये की चपत
पीड़ित ने बताया कि आरोपियों के कहने पर उन्होंने अलग-अलग किस्तों में कुल 1.87 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए। जब उन्होंने अपना मुनाफा निकालने का प्रयास किया, तो उन्हें और अधिक पैसों की मांग की जाने लगी या तकनीकी कारणों का हवाला दिया गया। तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर गिरोह का शिकार हो चुके हैं।
पुलिस की कार्रवाई और चेतावनी
साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध आईपीसी और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। पुलिस अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को ट्रेस कर रही है जिनके माध्यम से यह ठगी की गई।





