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उत्तर कोरिया का शक्ति प्रदर्शन: अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास के बीच दागीं 10 बैलिस्टिक मिसाइलें; जापान और दक्षिण कोरिया हाई अलर्ट पर

प्योंगयांग/सियोल (14 मार्च, 2026): कोरियाई प्रायद्वीप में एक बार फिर युद्ध की आहट तेज हो गई है। उत्तर कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास का कड़ा विरोध करते हुए समुद्र की ओर एक साथ 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर सनसनी फैला दी है। इस आक्रामक कार्रवाई के बाद जापान और दक्षिण कोरिया की सेनाएं ‘हाई अलर्ट’ पर हैं और क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

प्योंगयांग से एक साथ दागे गए 10 घातक हथियार

दक्षिण कोरियाई सैन्य सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्षेपण उत्तर कोरिया की ओर से अब तक के सबसे बड़े शक्ति प्रदर्शनों में से एक है:

  • प्रक्षेपण स्थल: मिसाइलें उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग के पास स्थित एक सैन्य क्षेत्र से दागी गईं।
  • लक्ष्य: सभी मिसाइलों ने पूर्व की ओर उड़ान भरी और जापान के सागर (Sea of Japan) में जाकर गिरीं।
  • जापान की प्रतिक्रिया: जापान के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ये मिसाइलें उनके विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के ठीक बाहर समुद्र में गिरीं, जिससे फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।

सैन्य अभ्यास से भड़का तानाशाह किम जोंग उन

उत्तर कोरिया की इस कार्रवाई को अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच चल रहे ‘एनुअल ड्रिल’ (Annual Exercise) का जवाब माना जा रहा है:

  1. हजारों सैनिकों का युद्धाभ्यास: वर्तमान में अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सेनाएं हजारों सैनिकों, लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों के साथ वार्षिक युद्धाभ्यास कर रही हैं।
  2. उत्तर कोरिया की चेतावनी: प्योंगयांग ने हमेशा इन अभ्यासों को ‘आक्रमण का रिहर्सल’ करार दिया है। उत्तर कोरिया ने चेतावनी दी है कि यदि उसकी संप्रभुता को खतरा हुआ, तो वह अपनी परमाणु शक्ति का उपयोग करने से भी पीछे नहीं हटेगा।
  3. ट्रंप प्रशासन की बढ़ी चुनौतियां: यह मिसाइल परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी प्रशासन पहले से ही पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध की चुनौतियों का सामना कर रहा है।

दक्षिण कोरिया और जापान ने बढ़ाई निगरानी

मिसाइल हमलों के बाद सियोल और टोक्यो ने अपनी रक्षात्मक प्रणालियों को सक्रिय कर दिया है:

  • त्रिपक्षीय सहयोग: दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान की सेनाएं लगातार डेटा साझा कर रही हैं ताकि मिसाइलों की सटीक रेंज और मारक क्षमता का विश्लेषण किया जा सके।
  • अतिरिक्त निगरानी: दक्षिण कोरियाई ‘ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ’ ने कहा कि सेना ने उत्तर कोरियाई गतिविधियों की चौबीसों घंटे निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी भी संभावित अतिरिक्त हमले का तुरंत जवाब दिया जा सके।

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