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होर्मुज में आवाजाही बाधित होने से भारत की बढ़ी चिंता; UNSC में उठाई आवाज— ‘ऊर्जा सुरक्षा के लिए जल्द मिले सुरक्षित समुद्री मार्ग’

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरों के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में किसी भी प्रकार का अवरोध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। भारत ने तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए समुद्री जलमार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की पुरजोर अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा रुख

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ‘समुद्री क्षेत्र में जलमार्गों की सुरक्षा और संरक्षण’ विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण परिचर्चा (ओपन डिबेट) के दौरान भारत ने अपना पक्ष रखा।

  • सुरक्षित आवाजाही की अपील: संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रभारी योजना पटेल ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार के सुचारू संचालन के लिए होर्मुज में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार: भारत ने वैश्विक समुदाय को आगाह किया कि इस रणनीतिक जलमार्ग में किसी भी तरह की नाकाबंदी या सैन्य हस्तक्षेप का सीधा असर ईंधन की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर पड़ेगा।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ‘होर्मुज’?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारा माना जाता है।

  • ऊर्जा सुरक्षा की लाइफलाइन: भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, जो इसी जलमार्ग के जरिए भारत पहुँचता है।
  • महंगाई का खतरा: यदि होर्मुज में तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही रुकती है या जोखिम बढ़ता है, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

समुद्री डकैती और अस्थिरता पर चिंता

योजना पटेल ने अपने संबोधन के दौरान समुद्री क्षेत्र में बढ़ती असुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन पर भी ध्यान केंद्रित किया।

  1. निर्बाध व्यापार का अधिकार: भारत ने जोर देकर कहा कि समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में शांतिपूर्ण आवाजाही का अधिकार है और किसी भी देश को इसे बाधित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
  2. वैश्विक सहयोग की आवश्यकता: भारत ने आह्वान किया कि समुद्री सुरक्षा केवल एक देश की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए सभी हितधारकों को आपसी सहयोग बढ़ाना होगा ताकि व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित गलियारा मिल सके।

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