लंदन/नई दिल्ली: भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग को एक नई ऊंचाई देते हुए दोनों देशों ने सैन्य प्रशिक्षण और रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति जताई है। भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान की हालिया तीन दिवसीय ब्रिटेन यात्रा के दौरान भारतीय वायुसेना (IAF) के प्रशिक्षकों की ब्रिटेन में तैनाती का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह दौरा न केवल सैन्य कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने भविष्य के ‘रक्षा औद्योगिक रोडमैप’ को भी नई गति प्रदान की है।
ब्रिटेन के आरएएफ वैली में जुटेंगे भारतीय जांबाज
इस यात्रा का सबसे दूरगामी परिणाम सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में सामने आया है।
- फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर की तैनाती: भारत और ब्रिटेन के बीच हुए समझौते के अनुसार, भारतीय वायुसेना के अनुभवी फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स को ब्रिटेन के प्रतिष्ठित आरएएफ (रॉयल एयर फोर्स) वैली में तैनात किया जाएगा।
- साझा अनुभव का लाभ: यह कदम दोनों वायुसेनाओं के बीच तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान और आपसी तालमेल (Interoperability) को बेहतर बनाने में सहायक होगा। इससे भारतीय अफसरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण देने और प्राप्त करने का अनूठा अवसर मिलेगा।
सैन्य नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय मंथन
19 से 21 अप्रैल तक चली इस आधिकारिक यात्रा के दौरान जनरल अनिल चौहान ने ब्रिटेन के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ गहन चर्चा की।
- भव्य स्वागत: ब्रिटेन के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, एयर चीफ मार्शल सर रिचर्ड नाइटन ने जनरल चौहान की अगवानी की।
- रणनीतिक चर्चा: बैठक में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, आधुनिक सैन्य रणनीति और बदलती वैश्विक सुरक्षा स्थितियों पर विस्तार से बात की गई। दोनों देशों ने भविष्य की साझा चुनौतियों से निपटने के लिए एक संयुक्त सैन्य दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
रक्षा उद्योग और आर्थिक सहयोग पर फोकस
सीडीएस जनरल चौहान ने अपनी यात्रा के दौरान केवल सैन्य ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और औद्योगिक नेतृत्व के साथ भी संवाद स्थापित किया।
- मंत्रियों से मुलाकात: उन्होंने ब्रिटेन के रक्षा राज्य मंत्री ल्यूक पोलार्ड और इंडो-पैसिफिक मामलों की राज्य मंत्री सीमा मल्होत्रा से भेंट की। इस दौरान साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष (Space) और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई।
- औद्योगिक रोडमैप: भारत-ब्रिटेन के बीच पहले से तय ’10 वर्षीय रक्षा औद्योगिक रोडमैप’ को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इसमें रक्षा उत्पादन में सहयोग, रोजगार सृजन और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले रक्षा समझौतों पर जोर दिया गया।
वैश्विक सुरक्षा पर भारत का दृष्टिकोण
जनरल चौहान ने अपनी यात्रा के दौरान वैश्विक अकादमिक जगत के साथ भी संवाद किया।
- रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज: यहां सीडीएस ने वैश्विक सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर भारत के उभरते दृष्टिकोण को साझा किया।
- राउंडटेबल बैठक: उन्होंने एक उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें सैन्य परिवर्तन (Military Transformation) और भविष्य के युद्ध कौशल (Modern Warfare) पर विचार-विमर्श किया गया।




