काबुल/इस्लामाबाद (14 मार्च, 2026): अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद ने अब एक भीषण युद्ध का रूप ले लिया है। पाकिस्तानी सेना द्वारा अफगान सीमा के भीतर की गई हालिया सैन्य कार्रवाई के जवाब में तालिबान सरकार ने कड़ा पलटवार किया है। अफगानिस्तान के कुनार और नांगरहार प्रांतों में हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 14 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबर है। इस घटना के बाद डूरंड रेखा (Durand Line) पर तनाव चरम पर पहुंच गया है और दोनों ओर से भारी हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
संघर्ष की शुरुआत: पाकिस्तानी हवाई हमलों का जवाब
तालिबान रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह जवाबी कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा अफगान क्षेत्र में किए गए कथित हवाई हमलों और गोलाबारी के बाद की गई है:
- सीमा पार कार्रवाई: पाकिस्तान ने दावा किया था कि वह अपनी सीमा में आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए ‘इंटेलिजेंस-आधारित’ ऑपरेशन चला रहा है।
- तालिबान का कड़ा रुख: अफगान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके तुरंत बाद तालिबान बलों ने पाकिस्तानी सुरक्षा चौकियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
मैदान-ए-जंग बने कुनार और नांगरहार
झड़पों का मुख्य केंद्र अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत रहे हैं:
- नांगरहार प्रांत: यहां सीमावर्ती जिलों में दोनों सेनाओं के बीच आमने-सामने की फायरिंग हुई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तालिबान ने अत्याधुनिक हथियारों और मोर्टार का उपयोग कर पाकिस्तानी चौकियों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
- कुनार प्रांत: पहाड़ी इलाकों में घात लगाकर किए गए हमलों में पाकिस्तानी सेना को जान-माल का बड़ा नुकसान हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, मारे गए 14 सैनिकों के अलावा कई अन्य घायल भी हुए हैं।
डूरंड रेखा पर बढ़ता तनाव और विस्थापन
इस सैन्य टकराव का सबसे बुरा असर सीमा पर रहने वाले आम नागरिकों पर पड़ा है:
- पलायन की स्थिति: गोलाबारी के डर से सीमावर्ती गांवों के सैकड़ों परिवारों ने सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना शुरू कर दिया है।
- भारी सैन्य तैनाती: पाकिस्तान ने अपनी ओर से सीमा पर अतिरिक्त कुमुक और बख्तरबंद गाड़ियां तैनात कर दी हैं, वहीं तालिबान ने भी अपने ‘बद्री यूनिट’ के लड़ाकों को मोर्चे पर भेज दिया है।
कूटनीतिक संकट: रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट
यह संघर्ष केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक रूप से भी दोनों देश आमने-सामने हैं:
- पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान प्रतिबंधित संगठन टीटीपी (TTP) को शरण दे रहा है।
- दूसरी ओर, तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं का दोष अफगानिस्तान पर मढ़ रहा है।





