चेन्नई/नई दिल्ली (11 मार्च, 2026): तमिलनाडु के अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पार्टी पर कड़ा प्रहार किया है। पश्चिमी एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध और भारत पर उसके संभावित असर को लेकर प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर जनता के बीच डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करने का गंभीर आरोप लगाया। एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब देश को एकजुट होकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करना चाहिए, तब विपक्ष नकारात्मक राजनीति के जरिए नागरिकों को गुमराह कर रहा है।
पीएम मोदी का प्रहार: ‘कांग्रेस की पुरानी रणनीति’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस की आलोचना करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
- भय का माहौल: पीएम ने कहा कि कांग्रेस सोशल मीडिया और बयानों के जरिए यह डर फैला रही है कि मिडिल ईस्ट संकट से भारत की अर्थव्यवस्था ढह जाएगी और पेट्रोल-डीजल मिलना बंद हो जाएगा।
- भ्रम फैलाने की राजनीति: मोदी ने आरोप लगाया कि विपक्ष अंतरराष्ट्रीय संकटों का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए कर रहा है, जो देश के मनोबल को कमजोर करने जैसा है।
- भारत की ताकत का उपहास: पीएम ने दुख जताया कि जब दुनिया भारत की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और कुशल कूटनीति की सराहना कर रही है, तब कांग्रेस इसे संकट के रूप में पेश कर रही है।
सरकार का पक्ष: ‘हम हर चुनौती के लिए तैयार’
जनता को आश्वस्त करते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की तैयारियों का ब्यौरा भी पेश किया:
- सुरक्षित आपूर्ति: उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने 40 से अधिक देशों से तेल के सौदे सुनिश्चित कर लिए हैं, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन की कोई कमी नहीं होगी।
- भारतीयों की सुरक्षा: पीएम ने कहा कि युद्ध क्षेत्र से हजारों भारतीयों को सुरक्षित वापस लाना हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसे विपक्ष नजरअंदाज कर रहा है।
- मजबूत अर्थव्यवस्था: उन्होंने बताया कि पिछले संकटों की तरह इस बार भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार और रणनीतिक तेल भंडार किसी भी झटके को सहने के लिए पर्याप्त है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक गरमाहट
प्रधानमंत्री के इस हमले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा है कि वह जनता को महंगाई और तेल की बढ़ती कीमतों के खतरों के प्रति आगाह कर रही है, जिसे सरकार ‘भय’ का नाम दे रही है। आगामी चुनावों के मद्देनजर, मिडिल ईस्ट संकट अब घरेलू राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बन गया है।





