वॉशिंगटन/नई दिल्ली (11 मार्च, 2026): वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी भारी उथल-पुथल के बीच अमेरिका ने आखिरकार भारत की उस ‘स्वतंत्र ऊर्जा नीति’ की ताकत को स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत भारत ने पश्चिमी दबाव के बावजूद रूस से भारी मात्रा में कच्चे तेल का आयात जारी रखा। अमेरिकी प्रशासन के ताजा बयानों से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि रूस से तेल खरीदने को लेकर जो अमेरिका पहले सख्त तेवर दिखा रहा था, अब उसके सुर पूरी तरह बदल चुके हैं। वॉशिंगटन ने माना है कि भारत की इस रणनीति ने न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को संभाला, बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों को एक बड़े विस्फोट से बचाने में भी मदद की है।
बदले हुए सुर: प्रतिबंधों के बीच भारत का ‘मास्टरस्ट्रोक’
अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भारत के रुख पर सकारात्मक टिप्पणी की है:
- कीमतों पर नियंत्रण: अमेरिका ने स्वीकार किया कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की मांग अचानक बढ़ जाती और कीमतें $200 प्रति बैरल तक पहुँच सकती थीं।
- अर्थव्यवस्था का संतुलन: भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदकर अपनी घरेलू मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित रखा, जिसे अमेरिका ने एक “कुशल आर्थिक प्रबंधन” करार दिया है।
- दबाव से हटकर संवाद: पहले भारत पर प्रतिबंधों की चेतावनी देने वाले अमेरिका ने अब कहा है कि भारत के साथ उसका ऊर्जा सहयोग पहले से कहीं अधिक मजबूत है।
भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की जीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार स्पष्ट किया था कि भारत का पहला कर्तव्य अपने नागरिकों को सस्ता ईंधन उपलब्ध कराना है:
- राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: भारत ने पश्चिमी देशों के ‘प्राइस कैप’ (Price Cap) के बावजूद अपनी शर्तों पर व्यापार जारी रखा, जिससे रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया।
- सप्लाई चेन का विविधीकरण: भारत ने केवल रूस पर निर्भर रहने के बजाय 40 अन्य देशों से भी तेल के सौदे किए, जिससे उसकी सौदेबाजी की शक्ति (Bargaining Power) बढ़ गई।
- यूरोप का दोहरा मापदंड: भारत ने दुनिया को आईना दिखाया कि कैसे यूरोपीय देश खुद रूस से गैस खरीद रहे थे, जबकि भारत को उपदेश दे रहे थे।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत का बढ़ता कद
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह बदला हुआ रुख भारत की बढ़ती आर्थिक और कूटनीतिक शक्ति का परिचायक है:
- बड़ा उपभोक्ता: भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। कोई भी बड़ी शक्ति भारत जैसे विशाल बाजार को नजरअंदाज करने का जोखिम नहीं उठा सकती।
- रिफाइनिंग हब: भारत अब रूसी कच्चे तेल को रिफाइन कर डीजल और पेट्रोल के रूप में यूरोप और अन्य देशों को निर्यात कर रहा है, जिससे वह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है।





