देहरादून/ऋषिकेश: उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध चारधामों में शामिल बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर की पवित्रता और मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मंदिर समिति की बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया है कि अब मंदिर के मुख्य परिसर और गर्भगृह में गैर-सनातनियों का प्रवेश वर्जित रहेगा। इसके साथ ही, यात्रा को सुव्यवस्थित करने और परंपराओं के संरक्षण के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई गई है।
पवित्रता की रक्षा: क्यों लिया गया यह निर्णय?
BKTC के अध्यक्ष अजेंद्र अजय की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि धामों की धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रवेश नियमों को सख्त करना आवश्यक है।
- केवल सनातनियों को अनुमति: पारित प्रस्ताव के अनुसार, अब मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए व्यक्ति का हिंदू धर्म (सनातनी) का अनुयायी होना अनिवार्य होगा।
- अमर्यादित आचरण पर रोक: पिछले कुछ समय से धामों में रील बनाने, अभद्र आचरण और गैर-धार्मिक गतिविधियों की शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया है।
- सत्यापन की प्रक्रिया: मंदिर के मुख्य द्वारों पर अब जांच और सत्यापन की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा ताकि परंपराओं का पालन सुनिश्चित हो सके।
BKTC बोर्ड बैठक के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
मंदिर समिति ने केवल प्रवेश ही नहीं, बल्कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई अन्य पहलुओं पर भी बड़े फैसले लिए हैं:
- ड्रेस कोड का पालन: श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में मर्यादित वस्त्र पहनना अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। छोटे कपड़े या अमर्यादित पहनावे के साथ प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
- सोने की परत और मुकुट विवाद पर स्पष्टता: हाल ही में चर्चाओं में रहे आभूषणों के स्टॉक और सोने की परत की नियमित जांच और पारदर्शिता के लिए एक नई निगरानी समिति के गठन का प्रस्ताव रखा गया है।
- डिजिटल डोनेशन: मंदिर में दान प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए क्यूआर कोड और डिजिटल भुगतान की व्यवस्था को मंदिर के आधिकारिक काउंटरों तक ही सीमित करने का निर्णय लिया गया है ताकि धोखाधड़ी से बचा जा सके।
- व्यवस्थाओं का आधुनिकीकरण: तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए टोकन सिस्टम और कतार प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल करने पर सहमति बनी है।
विरोध और समर्थन: गरमाई राजनीति
BKTC के इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं:
- तीर्थ पुरोहितों का समर्थन: केदारसभा और बदरीनाथ के तीर्थ पुरोहितों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘देवभूमि की संस्कृति की रक्षा’ के लिए उठाया गया जरूरी कदम बताया है।
- विपक्ष के सवाल: कुछ हलकों में इसे समावेशी संस्कृति के खिलाफ बताया जा रहा है, हालांकि मंदिर समिति का तर्क है कि प्रत्येक धार्मिक स्थल की अपनी नियमावली और मर्यादा होती है जिसका पालन अनिवार्य है।





