हल्द्वानी: पश्चिम एशिया के युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधा के कारण उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में रसोई गैस (LPG) का संकट गहरा गया है। शहर में गैस की भारी किल्लत के बीच आम आदमी की रसोई के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई घरों में पिछले चार दिनों से भोजन नहीं पका है, जिसके कारण अभिभावकों को मजबूरी में बच्चों का पेट भरने के लिए बाजार के ‘फास्ट फूड’ का सहारा लेना पड़ रहा है।
चूल्हे ठंडे: मजबूरी में चाऊमीन-मोमो पर निर्भर बच्चे
शहर के कई इलाकों से दिल दहला देने वाली खबरें आ रही हैं, जहाँ गैस सिलेंडर खत्म होने के बाद लोगों के पास खाना बनाने का कोई विकल्प नहीं बचा है:
- बच्चों की सेहत पर मार: गैस न मिलने के कारण कई अभिभावकों ने बताया कि वे पिछले दो-तीन दिनों से बच्चों को चाऊमीन, मोमो और बिस्कुट खिलाकर गुजारा करवा रहे हैं। घर में रोटी-सब्जी न बन पाने के कारण बच्चों के पोषण पर बुरा असर पड़ रहा है।
- अभिभावकों का त्याग: संसाधनों की कमी के चलते कई पिताओं ने खुद भूखा रहकर बच्चों का पेट भरने को प्राथमिकता दी है। गैस एजेंसियों के चक्कर काटते हुए लोगों का सब्र अब जवाब देने लगा है।
एजेंसियों पर लंबी कतारें, स्टॉक खाली
हल्द्वानी की विभिन्न गैस एजेंसियों पर सुबह चार बजे से ही लोग खाली सिलेंडर लेकर लाइनों में लग रहे हैं, लेकिन दोपहर होते-होते ‘स्टॉक खत्म’ होने की सूचना उन्हें निराश कर रही है:
- चार दिन का बैकलॉग: आपूर्ति में आई रुकावट के चलते हल्द्वानी में सिलेंडर की डिलीवरी का बैकलॉग चार से पांच दिन तक पहुँच गया है।
- बुकिंग के बावजूद इंतजार: जिन उपभोक्ताओं ने हफ़्तों पहले बुकिंग कराई थी, उन्हें भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। बुकिंग हेल्पलाइन और ऑनलाइन ऐप भी लोड बढ़ने के कारण बार-बार क्रैश हो रहे हैं।
क्यों पैदा हुआ यह संकट?
स्थानीय प्रशासन और आपूर्ति विभाग के अनुसार, इस किल्लत के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:
- वैश्विक तनाव: ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर हल्द्वानी जैसे शहरों के वितरण केंद्रों तक पहुँचा है।
- कमर्शियल सप्लाई पर रोक: घरेलू मांग को पूरा करने के लिए कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति पहले ही रोकी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद घरेलू मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है।
प्रशासन से गुहार: “हमें राशन नहीं, गैस चाहिए”
निराश नागरिकों ने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि अगले 24 घंटों में आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चों को लगातार बाहर का जंक फूड खिलाना उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ है, लेकिन अभिभावकों के पास फिलहाल और कोई रास्ता नहीं है।





