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संसद में तीखी बहस: ‘रिजिजू सबसे ज्यादा टोकते हैं लेकिन हमने इतना गैर-जिम्मेदार विपक्ष भी नहीं देखा’, शाह का गोगोई को करारा जवाब

नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर आज सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त वाकयुद्ध देखने को मिला। 118 सांसदों के हस्ताक्षर वाले इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर तीखा हमला बोला, जिस पर गृह मंत्री अमित शाह ने अपने चिर-परिचित अंदाज में पलटवार किया। शाह ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पर लगे आरोपों को चतुराई से विपक्ष की ओर मोड़ते हुए उन्हें ‘सबसे गैर-जिम्मेदार विपक्ष’ करार दिया।

गौरव गोगोई का आरोप: ‘राहुल गांधी को 20 बार रोका गया’

चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा:

  • भाषण में बाधा: गोगोई ने दावा किया कि धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को उनके भाषण के दौरान 20 बार रोका गया।
  • तय योजना का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर ने विपक्ष को बोलने से रोकने के लिए पूर्व नियोजित तरीके से बाधा डाली, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।
  • रिजिजू पर तंज: गोगोई ने किरेन रिजिजू पर निशाना साधते हुए कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड की जांच होगी, तो रिजिजू का नाम ‘विपक्ष को सबसे ज्यादा टोकने वाले संसदीय कार्य मंत्री’ के रूप में दर्ज होगा।

अमित शाह का पलटवार: ‘विपक्ष ने गिराया सदन का स्तर’

गौरव गोगोई के आरोपों का जवाब देने के लिए जब गृह मंत्री अमित शाह खड़े हुए, तो सदन में सन्नाटा छा गया। उन्होंने गोगोई की बात को स्वीकार करते हुए भी विपक्ष पर जोरदार प्रहार किया:

“मैं गोगोई जी की इस बात से सहमत हूं कि किरेन रिजिजू ने संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर सबसे ज्यादा बाधा डाली है, लेकिन यह भी सच है कि भारतीय संसद के इतिहास में हमने इतना गैर-जिम्मेदार विपक्ष भी कभी नहीं देखा।” — अमित शाह, गृह मंत्री

अमित शाह ने अपने तर्क में कहा कि जब विपक्ष सदन की मर्यादाओं को ताक पर रखकर गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करता है, तब सरकार और संसदीय कार्य मंत्री को हस्तक्षेप करना ही पड़ता है। उन्होंने विपक्ष पर लापरवाही और बिना तथ्यों के शोर मचाने का आरोप लगाया।

अविश्वास प्रस्ताव के मुख्य बिंदु

विपक्ष द्वारा लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं:

  1. पक्षपातपूर्ण व्यवहार: विपक्षी सांसदों का दावा है कि अध्यक्ष केवल सत्ता पक्ष के हितों का ध्यान रख रहे हैं।
  2. बोलने की आजादी: प्रस्ताव में कहा गया है कि विपक्षी सदस्यों के माइक बंद किए जाते हैं और उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने का अवसर नहीं दिया जाता।
  3. संख्या बल: हालाँकि विपक्ष के 118 सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन सदन में बहुमत न होने के कारण इस प्रस्ताव का गिरना लगभग तय माना जा रहा है।

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