दक्षिण 24 परगना। पश्चिम बंगाल के सागरद्वीप स्थित चकफुलदुबी बाजार की दुर्गा पूजा समिति को प्रशासनिक दबाव के चलते ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम पर बने अपने पूजा पंडाल को हटाना पड़ा। विवाद गहराने के बाद समिति ने नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार से प्राप्त 1.10 लाख रुपये का वार्षिक अनुदान लौटाने का फैसला किया है।
प्रशासन और समिति आमने-सामने
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने इस थीम पर आपत्ति जताते हुए आयोजकों को पंडाल खोलने से रोका। समिति ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक बताते हुए कहा कि सरकार को पूजा पंडाल की थीम तय करने का अधिकार नहीं है।
इस घटनाक्रम ने राजनीतिक तकरार को और तेज कर दिया है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने प्रशासन की कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा, “ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना के पराक्रम का प्रतीक है। इसे रोकना देशद्रोह के समान है। प्रशासन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।”
तृणमूल कांग्रेस का पलटवार
वहीं, स्थानीय विधायक और राज्य मंत्री बंकिम हाजरा ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “पूजा समिति में शामिल लोग भाजपा से जुड़े हैं। राजनीतिक लाभ लेने के लिए वे झूठे आरोप लगाकर तृणमूल कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।”
कोलकाता में भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थीम
इसी बीच, उत्तर कोलकाता की मशहूर संतोष मित्रा स्क्वायर पूजा समिति ने भी इस बार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को थीम बनाया है। यह समिति भाजपा पार्षद सजल घोष के नेतृत्व में काम कर रही है। उन्होंने भी आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी समिति पर लगातार दबाव बना रहा है।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को इसी पंडाल का उद्घाटन करेंगे।
क्या है ऑपरेशन सिंदूर?
‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सेना की उस कार्रवाई का नाम है, जो पाकिस्तान के खिलाफ उसके साहस और पराक्रम का प्रतीक मानी जाती है। इसी थीम को आधार बनाकर पंडाल तैयार किया गया था।
इस विवाद ने बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। जहां भाजपा प्रशासन को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का आरोपी ठहरा रही है, वहीं तृणमूल इसे महज राजनीतिक साजिश बता रही है।





