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ब्रिक्स में मध्य पूर्व मुद्दे पर सहमति नहीं, भारत ने दोहराया फिलिस्तीन समर्थन

नई दिल्ली/अंतरराष्ट्रीय डेस्क। ब्रिक्स देशों के बीच मध्य पूर्व संकट को लेकर साझा रुख बनाने की कोशिशें गहरे मतभेदों के कारण सफल नहीं हो सकीं। सदस्य देशों के अलग-अलग राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण के चलते संयुक्त सहमति बन पाना मुश्किल साबित हुआ, जबकि भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह फिलिस्तीन के वैध अधिकारों और दो-राष्ट्र समाधान का समर्थक है।

सूत्रों के अनुसार, हालिया ब्रिक्स बैठकों में गाजा और व्यापक मध्य पूर्व स्थिति पर चर्चा प्रमुख एजेंडा रही। हालांकि, सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष, युद्धविराम और राजनीतिक समाधान को लेकर अलग-अलग प्राथमिकताएं सामने आईं। कुछ देशों ने इजराइल की सुरक्षा चिंताओं पर जोर दिया, जबकि अन्य ने फिलिस्तीनी नागरिकों की मानवीय स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत सरकार ने अपने आधिकारिक रुख को दोहराते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति केवल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से संभव है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह आतंकवाद और हिंसा का विरोध करता है, लेकिन साथ ही फिलिस्तीनी जनता की वैध आकांक्षाओं का समर्थन करता है। भारत लंबे समय से स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीन राज्य की स्थापना के पक्ष में रहा है, जो सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजराइल के साथ शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहे।

राजनयिक सूत्रों का कहना है कि ब्रिक्स मंच विविध राजनीतिक व्यवस्थाओं और वैश्विक रणनीतिक हितों वाले देशों का समूह है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संकटों पर एकमत रुख बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है। मध्य पूर्व का मुद्दा विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि सदस्य देशों के पश्चिमी देशों, क्षेत्रीय शक्तियों और ऊर्जा हितों से जुड़े अलग-अलग संबंध हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिक्स मंच वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन जटिल भू-राजनीतिक मुद्दों पर सदस्य देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताएं अक्सर सामूहिक घोषणा को प्रभावित करती हैं। इसी कारण इस बार व्यापक संयुक्त बयान जारी करने में कठिनाई सामने आई।

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