उत्तराखंड में अप्रैल महीने की भीषण गर्मी ने पिछले 17 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। लगातार बढ़ते तापमान और हीटवेव की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन को एहतियाती कदम उठाने पड़े हैं। राजधानी देहरादून समेत मैदानी क्षेत्रों में असामान्य रूप से तेज गर्मी दर्ज की गई, जिससे जनजीवन प्रभावित होने लगा है।
मौसम विभाग के अनुसार इस बार अप्रैल में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहा, जो आमतौर पर मई-जून में देखने को मिलता है। अचानक बढ़ी गर्मी ने लोगों को हैरान कर दिया है, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी लू और डिहाइड्रेशन के खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है।
स्कूलों में अवकाश घोषित
भीषण गर्मी और हीटवेव के जोखिम को देखते हुए जिला प्रशासन ने देहरादून में कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों को एक दिन के लिए बंद रखने का आदेश जारी किया। यह फैसला बच्चों को हीट स्ट्रोक और पानी की कमी जैसी समस्याओं से बचाने के लिए लिया गया।
प्रशासन ने मुख्य शिक्षा अधिकारी और संबंधित विभागों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सभी बोर्ड—CBSE, ICSE और राज्य बोर्ड—के विद्यालयों पर यह आदेश समान रूप से लागू किया गया।
मैदानी इलाकों में बढ़ा असर
देहरादून सहित हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। दोपहर के समय बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही कम देखी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की सलाह
डॉक्टरों और प्रशासन ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।
जलवायु बदलाव का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल में इतनी तीव्र गर्मी जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव का संकेत है। आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना जताई गई है, इसलिए प्रशासन सतर्कता बरत रहा है।
तेजी से बढ़ती गर्मी ने साफ कर दिया है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य भी अब हीटवेव की चुनौती से अछूते नहीं रहे हैं।





