वाशिंगटन/संयुक्त राष्ट्र। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते समुद्री खतरों के बीच भारत ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का प्रस्ताव रखा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपनी 2028-29 की अस्थायी सदस्यता की दावेदारी के तहत समुद्री सुरक्षा और AI को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने सुरक्षा परिषद की उच्चस्तरीय चर्चा में कहा कि तकनीक का इस्तेमाल मानव सुरक्षा को मजबूत करने और समुद्री मार्गों को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि समुद्र में साझा संसाधनों को विवाद का केंद्र बनाने के बजाय सहयोग और सुरक्षा का माध्यम बनाया जाना चाहिए।
AI से संदिग्ध गतिविधियों पर रहेगी नजर
भारतीय राजदूत ने बताया कि AI की मदद से सैटेलाइट तस्वीरों, रडार और जहाजों की ट्रैकिंग से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया जा सकता है। इससे समुद्री क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने, जहाजों की निगरानी और समुद्री बचाव अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से बंदरगाहों, जहाजों और समुद्र के भीतर मौजूद संचार ढांचे पर साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।
होर्मुज में हमलों से वैश्विक व्यापार प्रभावित
भारत ने वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि समुद्री मार्गों में बाधा आने से वैश्विक आपूर्ति शृंखला प्रभावित होती है। इसका असर विशेष रूप से विकासशील देशों पर पड़ता है। हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों के समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आने की घटनाओं ने समुद्री सुरक्षा की चुनौती को और गंभीर बना दिया है।
2028-29 के लिए भारत की दावेदारी
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता की दावेदारी पेश की है। इस सीट के लिए जून 2027 में चुनाव होना प्रस्तावित है, जिसमें एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा।
भारतीय प्रतिनिधि ने हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR) का उदाहरण देते हुए कहा कि सूचनाओं का आदान-प्रदान और आपसी सहयोग समुद्री सुरक्षा मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत का यह प्रस्ताव ‘सागर’ यानी क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास की अवधारणा पर आधारित है।





