तेल अवीव। इजरायल में हुए राष्ट्रीय चुनाव के नतीजों ने देश में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ा दी है। चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट की विपक्षी पार्टी यशर बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए दोनों प्रमुख दलों को अरब पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
चुनाव परिणामों के अनुसार, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 53 सीटें मिली हैं, जबकि गादी आइसेनकोट की पार्टी यशर को 48 सीटों पर जीत मिली है। वहीं, अरब पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं। इस बार मतदान प्रतिशत करीब 78 फीसदी रहा, जिसे एक रिकॉर्ड माना जा रहा है।
नेतन्याहू की अपील का मतदाताओं पर नहीं पड़ा असर
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मतदाताओं से अपील की थी कि वे उन्हें देश को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकालने का मौका दें। हालांकि, उनकी अपील का अपेक्षित असर नहीं दिखा। उनके गठबंधन की सीटें पिछली बार के 68 से घटकर 53 रह गईं। सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान तथा ईरान के साथ हुए संघर्षों के बाद यह पहला राष्ट्रीय चुनाव है।
गाजा और ईरान पर क्या होगा असर?
चुनाव परिणामों के बाद गाजा और ईरान को लेकर इजरायल की नीतियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में पहले से तनाव बना हुआ है। गाजा का भविष्य अनिश्चित है, जबकि लेबनान और वेस्ट बैंक में भी हालात संवेदनशील हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सत्ता परिवर्तन होने के बावजूद इजरायल की सुरक्षा और विदेश नीति में तत्काल बड़े बदलाव की संभावना स्पष्ट नहीं है। नेतन्याहू कमजोर जरूर हुए हैं, लेकिन अभी भी सरकार बनाने की दौड़ में बने हुए हैं। वहीं, आइसेनकोट भी ईरान और हमास के खिलाफ सख्त रुख रखते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है चुनाव?
इजरायल में राजनीतिक बदलाव का असर भारत के साथ उसके संबंधों पर भी पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के अलावा तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, अंतरिक्ष और व्यापार के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ी है।
भारत के सामने चुनौती यह होगी कि इजरायल में नई सरकार बनने की स्थिति में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाए रखने के साथ अरब देशों और ईरान के साथ अपने पारंपरिक रिश्तों में भी संतुलन बनाए रखे। हालांकि, सरकार बदलने से भारत-इजरायल संबंधों में बड़े बदलाव की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।





