वाशिंगटन। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोप को रूसी प्राकृतिक गैस की आपूर्ति दोबारा शुरू करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। अमेरिकी प्रशासन इस दिशा में एक नई योजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत यूक्रेन के रास्ते रूसी गैस फिर से यूरोपीय देशों तक पहुंचाई जा सकती है। इसका उद्देश्य रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा संघर्ष को कम करना और व्यापक शांति समझौते का रास्ता तैयार करना है।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधि रूस से यूरोप को गैस निर्यात दोबारा शुरू कराने के लिए बातचीत कर रहे हैं। प्रस्ताव में अमेरिकी मध्यस्थ की भूमिका और गैस बिक्री से होने वाली आय को एस्क्रो खाते में रखने का विकल्प भी शामिल है। इससे रूस को आर्थिक लाभ मिल सकता है, जबकि यूक्रेन को गैस पारगमन शुल्क के रूप में राजस्व प्राप्त होगा।
यूरोप को सस्ती गैस मिलने की उम्मीद
अमेरिका का मानना है कि रूसी गैस की आपूर्ति बहाल होने से यूरोप को अपेक्षाकृत सस्ती ऊर्जा मिल सकती है। इससे क्षेत्र में बढ़ती ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम होगा। साथ ही रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा क्षेत्र में युद्धविराम की संभावना भी मजबूत हो सकती है।
यूरोपीय देशों का विरोध
हालांकि, इस प्रस्ताव को यूरोप में राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कई यूरोपीय नेता रूस पर ऊर्जा निर्भरता दोबारा बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद यूरोपीय संघ ने रूसी गैस पर निर्भरता खत्म करने की नीति अपनाई है। यूरोपीय संघ की योजना नवंबर 2027 तक रूसी गैस आयात पूरी तरह बंद करने की है।
पहले 45 प्रतिशत थी निर्भरता
रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले यूरोप की कुल गैस जरूरतों का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा रूस से आता था। मौजूदा समय में यह घटकर करीब 11 प्रतिशत रह गया है। जनवरी 2025 में यूक्रेन के रास्ते रूसी गैस की आपूर्ति बंद होने के बाद यूरोप को ऊर्जा के अन्य स्रोतों पर निर्भर होना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कतर से एलएनजी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच यूरोप के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की जरूरत बढ़ गई है।
हालांकि, अमेरिकी प्रस्ताव पर अभी संबंधित पक्षों के बीच सहमति नहीं बनी है। ऐसे में यूक्रेन के रास्ते रूसी गैस की दोबारा आपूर्ति शुरू होगी या नहीं, यह आने वाली कूटनीतिक बातचीत पर निर्भर करेगा।





