प्योंगयांग। उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल में लगाए जा सकने वाले घातक क्लस्टर बम वारहेड का परीक्षण किया है। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) ने रविवार को इसकी जानकारी दी। यह परीक्षण शनिवार, 31 अक्टूबर को किया गया था।
उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रशासन के अनुसार, इस परीक्षण का उद्देश्य सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाले क्लस्टर बम वारहेड की युद्धक क्षमता और मारक शक्ति का आकलन करना था।
13 हेक्टेयर क्षेत्र को तबाह करने का दावा
उत्तर कोरिया के रक्षा अनुसंधान संस्थानों ने दावा किया कि स्टैंडर्ड टाइप-2 क्लस्टर वारहेड अपनी अधिकतम मारक क्षमता के साथ 12 से 13 हेक्टेयर क्षेत्र को तबाह कर सकता है। यह लगभग 29 से 32 एकड़ के बराबर है।
क्लस्टर बम में कई छोटे विस्फोटक बम होते हैं, जिन्हें एक बड़े वारहेड के भीतर रखा जाता है। हवा में विस्फोट होने के बाद ये छोटे बम बड़े क्षेत्र में फैलकर एक साथ विस्फोट करते हैं। इससे सैन्य ठिकानों, वाहनों और सैनिकों को व्यापक नुकसान पहुंच सकता है।
चार प्रकार के वारहेड विकसित कर रहा उत्तर कोरिया
उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रशासन के प्रमुख ने बताया कि क्लस्टर बम वारहेड को उनके इस्तेमाल और लक्ष्य के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है। देश की योजना है कि 2026 के अंत तक सेना की विभिन्न इकाइयों को इन सभी प्रकार के वारहेड इस्तेमाल करने में सक्षम बनाया जाए।
दक्षिण कोरिया ने भी की पुष्टि
दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया कि उसने उत्तर कोरिया की ओर से किए गए मिसाइल प्रक्षेपण पर नजर रखी थी। मिसाइल उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के चोंगजू इलाके से पीले सागर की दिशा में दागी गई थी। दक्षिण कोरिया और अमेरिका की सेनाएं इस गतिविधि पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने इससे पहले अप्रैल 2026 में भी क्लस्टर बम से लैस सामरिक मिसाइल का परीक्षण किया था। हाल के दिनों में देश ने ड्रोन और अन्य आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन भी किया है। लगातार हो रहे इन परीक्षणों से कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।





