Top 5 This Week

Related Posts

रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के लिए जेलेंस्की ने अमेरिका से मांगी पैट्रियट मिसाइलें

वाशिंगटन। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर एक बार फिर अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि यदि अमेरिका यूक्रेन को पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलें उपलब्ध कराता है तो उनका देश रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के लिए तैयार है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने यह प्रस्ताव रखा है।

फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में जेलेंस्की ने कहा कि रूस लगातार यूक्रेन के बिजली संयंत्रों, गैस सुविधाओं और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है। ऐसे में यूक्रेन के लिए जवाबी कार्रवाई करना जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि रूस यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले बंद करता है तो कीव भी रूसी रिफाइनरियों को निशाना बनाना बंद कर सकता है।

एक महीने के लिए हमले रोकने का प्रस्ताव

जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका यदि एक महीने के लिए पैट्रियट मिसाइलें उपलब्ध कराता है तो यूक्रेन भी उतने ही समय तक रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोक देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन इन मिसाइलों के लिए आर्थिक भुगतान करने को भी तैयार है। यह केवल सैन्य सहायता का मामला नहीं है।

अमेरिका ने 500 मिसाइलों की बिक्री को दी मंजूरी

अमेरिकी विदेश विभाग ने 30 अक्टूबर को यूक्रेन को 2.1 अरब डॉलर की लागत से 500 पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की बिक्री को मंजूरी दी थी। इस खरीद के लिए कनाडा, जर्मनी और नार्वे आर्थिक मदद दे रहे हैं।

हालांकि, जेलेंस्की ने चिंता जताई है कि इन मिसाइलों की आपूर्ति में कई साल लग सकते हैं। उन्होंने अमेरिका से तत्काल जरूरत को देखते हुए जल्द डिलीवरी की व्यवस्था करने की अपील की है।

ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को लेकर बढ़ा दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले बंद करें। ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के बीच अमेरिका दोनों देशों के बीच ऊर्जा युद्धविराम कराने की कोशिश कर रहा है।

वहीं, यूक्रेन का कहना है कि जब तक रूस उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाता रहेगा, तब तक जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी। ऐसे में पैट्रियट मिसाइलों की आपूर्ति और ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का प्रस्ताव आने वाले दिनों में अमेरिका-यूक्रेन बातचीत का अहम मुद्दा बन सकता है।

Popular Articles