134वें उर्स की तैयारियां तेज, 12 दिन तक झूले, दुकानें और मेले की रौनक खींचेगी लोगों का ध्यान
हल्द्वानी। जहां चिराग-ए-विलायत से रोशन होती है मोहब्बत की राह, जहां दुआओं में उठते हैं हाथ और हर दिल में बसती है अकीदत की चाह। बाबा की चौखट पर सजती है रूहानियत की महफिल, तो कव्वाली के सुरों में घुल उठता है मोहब्बत का पैगाम। इसी पाकीजा एहसास के साथ बनभूलपुरा के लाइन नंबर 18 स्थित दरगाह हजरत चिराग अली शाह बाबा का 134वां उर्स-ए-मुकद्दस 1 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। उर्स को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। 12 नवंबर तक चलने वाले मेले में महफिल-ए-मिलाद, कव्वाली और जायरीनों की आमद के साथ झूले, खेल-खिलौनों की दुकानें, हलवा-पराठे और काला जादू जैसे आकर्षण भी लोगों को अपनी ओर खींचेंगे।
दरगाह कमेटी ने उर्स के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। उर्स में देश के विभिन्न हिस्सों से जायरीनों के पहुंचने की उम्मीद है। दरगाह परिसर और आसपास मेले की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। धार्मिक आयोजन के साथ बच्चों के मनोरंजन और खानपान की दुकानों से मेले में रौनक बढ़ेगी।
मिलाद से कव्वाली तक, सजेगी रूहानी महफिल
उर्स का आगाज 1 नवंबर, रविवार को नमाज-ए-इशा के बाद महफिल-ए-मिलाद-ए-पाक से होगा। 2 नवंबर से 12 नवंबर तक प्रतिदिन नमाज-ए-इशा के बाद महफिल-ए-सिमा यानी कव्वाली का आयोजन किया जाएगा। वहीं, 13 नवंबर, शुक्रवार को सुबह 4:40 बजे कुल शरीफ होगा। दरगाह कमेटी के अराकीन ने जायरीनों का इस्तकबाल करते हुए सभी से उर्स में शिरकत करने की अपील की है।





