न्यूयॉर्क/मुंबई: रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी ने न्यूयॉर्क में आयोजित ‘टाइम 100 समिट’ के दौरान वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती ताकत और भविष्य के दृष्टिकोण को पुरजोर तरीके से रखा। टाइम मैगजीन की सीईओ जेसिका सिबली के साथ ‘लीडरशिप लेंस’ चर्चा में भाग लेते हुए नीता अंबानी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान विश्व व्यवस्था में सैन्य या आर्थिक दबाव (हार्ड पावर) के बजाय सांस्कृतिक, कलात्मक और मानवीय प्रभाव (सॉफ्ट पावर) की आवश्यकता कहीं अधिक बढ़ गई है।
‘भारत का समय आ गया है’: वैश्विक नेतृत्व पर जोर
नीता अंबानी ने अपने संबोधन में इस बात को रेखांकित किया कि अब दुनिया के पटल पर भारत का नेतृत्व करने का समय आ चुका है।
- सॉफ्ट पावर का महत्व: उन्होंने तर्क दिया कि आज की दुनिया जो तनाव और संघर्षों से जूझ रही है, उसे जोड़ने के लिए भारत की सॉफ्ट पावर—जैसे हमारी संस्कृति, योग, आयुर्वेद, कला और परोपकार की भावना—एक मरहम का काम कर सकती है।
- मानवीय दृष्टिकोण: नीता अंबानी के अनुसार, भारत इस सॉफ्ट पावर का सबसे बड़ा और जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है, जो न केवल आर्थिक रूप से बढ़ रहा है बल्कि अपनी जड़ों और मानवीय मूल्यों को भी वैश्विक स्तर पर साझा कर रहा है।
महिला सशक्तिकरण और शिक्षा पर संवाद
चर्चा के दौरान नीता अंबानी ने विकास की प्रक्रिया में महिलाओं और युवाओं की भूमिका पर भी विस्तार से बात की।
- समावेशी विकास: उन्होंने कहा कि भारत का विजन केवल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात पर आधारित है कि हम समाज के अंतिम व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं को कितना सशक्त बना पाते हैं।
- रिलायंस फाउंडेशन की भूमिका: उन्होंने अपने फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे जमीनी स्तर पर किए गए बदलाव किसी देश की छवि को वैश्विक मंच पर ऊंचा उठाते हैं।
भारत: विविधता और एकता का प्रतीक
नीता अंबानी ने भारत की विविधता को उसकी सबसे बड़ी शक्ति बताया।
- सांस्कृतिक राजदूत: उन्होंने वैश्विक नेताओं को भारत की समृद्ध विरासत और आधुनिक नवाचार के मेल से परिचित कराया।
- सकारात्मक प्रभाव: उन्होंने जोर देकर कहा कि सॉफ्ट पावर के माध्यम से भारत दुनिया भर में शांति और सहयोग का संदेश फैलाने के लिए प्रतिबद्ध है।





