नई दिल्ली। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी कंपनी के दिवालिया होने की स्थिति में भी कर्मचारियों को उनका भविष्य निधि (पीएफ) और ग्रेच्युटी का पूरा भुगतान किया जाएगा। यदि कंपनी ने इसके लिए अलग से फंड नहीं बनाया है, तब भी कर्मचारियों के वैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
यह फैसला जेट एयरवेज से जुड़े मामले में सुनाया गया है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि पीएफ, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी वैधानिक देनदारियां कंपनी की लिक्विडेशन एस्टेट (परिसमापन संपत्ति) का हिस्सा नहीं मानी जाएंगी। इसलिए इनका भुगतान अन्य लेनदारों के दावों की तरह परिसमापन प्रक्रिया के तहत नहीं किया जा सकता।
एनसीएलएटी ने कहा कि कर्मचारियों के इन अधिकारों की रक्षा करना कानून की मंशा है। केवल इस आधार पर कि कंपनी ने अलग फंड नहीं बनाया, कर्मचारियों को उनके वैधानिक लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में लिक्विडेटर या संबंधित प्राधिकारी को कर्मचारियों के पात्रता के अनुसार पीएफ और ग्रेच्युटी के भुगतान की व्यवस्था करनी होगी।
इस निर्णय को दिवालिया कंपनियों के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भविष्य में दिवालिया होने वाली कंपनियों से जुड़े मामलों में भी मिसाल बनेगा और कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों को मजबूत करेगा। साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि आर्थिक संकट का सबसे बड़ा बोझ कर्मचारियों पर न पड़े।





