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अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप: ‘सेवाश्रय कैंप’ में झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराने का दावा, राजनीतिक घमासान तेज

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी तनाव बढ़ गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी से जुड़े ‘सेवाश्रय’ चिकित्सा शिविरों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि इन शिविरों में मरीजों का इलाज कथित रूप से झोलाछाप (अप्रशिक्षित) डॉक्टरों द्वारा किया गया, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों ने इन शिविरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी की गई और योग्य चिकित्सकों की अनुपस्थिति में इलाज किया गया। विपक्ष का कहना है कि यह मामला सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

वहीं, टीएमसी की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि ‘सेवाश्रय’ कार्यक्रम जरूरतमंद लोगों तक मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से चलाया जाता है और इसे राजनीतिक रंग देकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

पार्टी ने यह भी कहा है कि सभी शिविरों में निर्धारित स्वास्थ्य मानकों का पालन किया जाता है और डॉक्टरों की निगरानी में ही सेवाएं दी जाती हैं। टीएमसी ने विपक्ष पर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।

इस बीच, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक योजनाओं को लेकर अक्सर सियासी टकराव देखने को मिलता है। ‘सेवाश्रय’ जैसे कार्यक्रम जहां एक ओर सरकार की जनकल्याणकारी पहल के रूप में पेश किए जाते हैं, वहीं विपक्ष इन पर पारदर्शिता और निगरानी को लेकर सवाल उठाता रहा है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। फिलहाल, इस विवाद पर किसी आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

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