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WHO प्रमुख पद की दौड़ में चीन की एंट्री, डॉ. सोंग ली को बनाया उम्मीदवार

बीजिंग। चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक पद के लिए वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सोंग ली को अपना उम्मीदवार नामित किया है। इस कदम के जरिए चीन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अपनी भूमिका और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। WHO के अगले प्रमुख का चुनाव मई 2027 में विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान किया जाएगा। 

स्वास्थ्य क्षेत्र में लंबा अनुभव

डॉ. सोंग ली चीन की वरिष्ठ सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी हैं। उन्हें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य नीतियों और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने SARS, बर्ड फ्लू और कोविड-19 जैसी स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान भी काम किया है।

कोविड महामारी के दौरान उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने और संक्रमण की रोकथाम से जुड़े दिशानिर्देश तैयार करने में भूमिका निभाई थी।

टेड्रोस की जगह लेने की तैयारी

WHO के मौजूदा महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस का दूसरा पांच वर्षीय कार्यकाल अगस्त 2027 में समाप्त होगा। नियमों के अनुसार, वह तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं लड़ सकते। ऐसे में संगठन को नया प्रमुख चुनना है।

चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि सोंग ली का नामांकन बहुपक्षवाद और WHO के प्रति चीन के समर्थन को दर्शाता है। चीन का कहना है कि उनकी नियुक्ति से वैश्विक स्वास्थ्य और मानव कल्याण को बढ़ावा मिल सकता है।

कई देशों के उम्मीदवार मैदान में

WHO के महानिदेशक पद के लिए सऊदी अरब, कतर, बेल्जियम, स्पेन, इंडोनेशिया और बोत्सवाना के उम्मीदवारों के नाम भी सामने आ चुके हैं। जनवरी 2027 में WHO का कार्यकारी बोर्ड उम्मीदवारों की सूची को सीमित करेगा। इसके बाद मई में विश्व स्वास्थ्य सभा अंतिम चयन करेगी।

अमेरिका की दूरी के बीच चीन की रणनीति

चीन का यह कदम ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने WHO से अमेरिका की वापसी का फैसला लिया है। इससे संगठन की वित्तीय स्थिति और वैश्विक भूमिका को लेकर भी चर्चा जारी है।

यदि डॉ. सोंग ली चुनी जाती हैं, तो वह WHO का नेतृत्व करने वाली दूसरी चीनी नागरिक होंगी। इससे पहले मार्गरेट चान ने 2007 से 2017 तक इस पद पर कार्य किया था।

अब नजर मई 2027 में होने वाले चुनाव पर है, जिसमें तय होगा कि वैश्विक स्वास्थ्य संगठन की कमान किसके हाथों में जाएगी।

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