गोपेश्वर। हिमालय की अधिष्ठात्री मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा गुरुवार को चमोली के वाण गांव पहुंची। यहां मां नंदा का उनके धर्म भाई लाटू देवता से पारंपरिक मिलन हुआ। देव डोलियों के इस भावुक दृश्य को देखकर बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। ग्रामीणों ने लोकगीतों और जागरों के साथ मां नंदा का स्वागत किया।
कनोल से रवाना हुई बड़ी जात यात्रा करीब नौ किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर वाण पहुंची। यात्रा में कुरुड़-दशोली की नंदा डोली, बंड की नंदा डोली, ल्वाणी की ज्वाल्पा देवी की डोली, बंड भूमियाल और गेंदाणु देवता की छंतोलियां सहित कई देव डोलियां शामिल रहीं। वाण पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक जागरों के साथ देव डोलियों का स्वागत किया।
बहनों के मिलन ने भावुक किया
यात्रा के दौरान राजराजेश्वरी मां की डोली भी वाण पहुंची। नंदा और राजराजेश्वरी की डोलियों के मिलन का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा। स्थानीय महिलाओं और भक्तों ने लोकगीतों और जागरों के माध्यम से देवी डोलियों का स्वागत किया।
वाण गांव में मां नंदा के धर्म भाई लाटू देवता का मंदिर स्थित है। परंपरा के अनुसार मां नंदा, राजराजेश्वरी और अन्य देव डोलियां लाटू देवता के मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगी। इसके बाद लाटू देवता से आगे की कठिन यात्रा के लिए अनुमति ली जाएगी। वाण के बाद यात्रा निर्जन और दुर्गम पड़ावों की ओर बढ़ेगी।
हजारों श्रद्धालु पहुंचे
मां नंदा की बड़ी जात यात्रा में शामिल होने के लिए वाण गांव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। पूरा क्षेत्र मां नंदा के जयकारों और पारंपरिक जागरों से गूंज रहा है। ग्रामीण श्रद्धालुओं की सेवा और व्यवस्था में जुटे हैं।
बारह वर्ष के अंतराल पर आयोजित होने वाली यह बड़ी जात यात्रा कुल करीब 296 किलोमीटर की पैदल यात्रा है, जिसकी अगुआई चौसिंग्या खाडू करता है। यात्रा के दौरान कई धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है।
वाण में प्रवास के बाद बड़ी जात यात्रा अगले पड़ाव गैरोलीपातल की ओर रवाना होगी। यात्रा के आगे बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या और उत्साह भी बढ़ता जा रहा है।





