हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय में मंगलवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर विशेष समिट का आयोजन किया गया। इसमें देश-विदेश से पहुंचे विशेषज्ञों ने एआई के दौर में लोकतंत्र की बदलती भूमिका और इससे जुड़ी संभावनाओं व चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के संतुलन पर भी चर्चा हुई।
समिट में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने युवाओं से तकनीक के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को टेक्नोलॉजी से प्रेम करना सीखना चाहिए। उनके अनुसार, बदलते तकनीकी दौर में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और उन्हें आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने भारत की ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीकी विकास के संबंध पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा तकनीकी विकास को हमेशा मानव कल्याण से जोड़कर देखती रही है। ऐसे में एआई के लाभ को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
समिट में एआई के सामाजिक प्रभाव, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर तकनीक के असर और भविष्य में इसके उपयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। कार्यक्रम में तकनीकी विकास के साथ समाज और मानवता के हितों को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर एआई आधारित पत्रिका सहित कई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। समिट में विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी रही। आयोजन का उद्देश्य एआई के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच लोकतंत्र, समाज और मानव मूल्यों से जुड़े विषयों पर संवाद को आगे बढ़ाना रहा।





