नई दिल्ली। कावेरी जल विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देशों का पालन करते हुए तमिलनाडु के लिए पानी छोड़े। अदालत ने कहा कि राज्य को प्राधिकरण के आदेश का अनुपालन करना होगा।
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि कर्नाटक उसके हिस्से का कावेरी जल पर्याप्त मात्रा में जारी नहीं कर रहा है। राज्य ने अदालत से कर्नाटक को तत्काल पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की थी। तमिलनाडु के अनुसार, CWMA की ओर से निर्धारित मात्रा उसकी वास्तविक हिस्सेदारी की तुलना में कम है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों के महत्व को रेखांकित किया। अदालत के निर्देश के बाद कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए निर्धारित जल प्रवाह सुनिश्चित करना होगा। इससे दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद में फिलहाल कर्नाटक पर दबाव बढ़ गया है।
दरअसल, CWMA ने कर्नाटक को प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक कावेरी जल तमिलनाडु के लिए छोड़ने का निर्देश दिया था। कर्नाटक सरकार ने इस मात्रा को अधिक बताते हुए अपनी जल जरूरतों और किसानों की चिंता का हवाला दिया था। राज्य सरकार ने संकेत दिया था कि वह इस मुद्दे पर कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकती है।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इससे पहले कहा था कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के साथ कानूनी निर्देशों का पालन करने की दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। उन्होंने बेहतर बारिश की उम्मीद भी जताई थी, जिससे जल संकट कम हो सके।
कावेरी जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब कर्नाटक की ओर से पानी छोड़ने की प्रक्रिया और राज्य सरकार की अगली रणनीति पर नजर रहेगी।





