देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कार्मिकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को सरल और अधिक लचीला बनाने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में अब विभिन्न सरकारी विभाग आगामी 10 जून तक अपने स्तर पर ही अनुरोध के आधार पर प्राप्त आवेदनों पर स्थानांतरण का निर्णय ले सकेंगे। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई ‘स्थानांतरण एक्ट’ की धारा-27 से संबंधित महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस कदम से शिक्षा विभाग सहित कई अन्य विभागों के हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
विभागों को मिली स्वायत्तता: 10 जून तक की समयसीमा
प्रशासनिक कार्यकुशलता और कर्मचारियों की व्यक्तिगत समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शासन ने विभागों को यह अधिकार सौंपा है।
- विभागीय स्तर पर निर्णय: अब स्थानांतरण के लिए शासन के चक्कर काटने के बजाय, विभाग स्वयं अपने स्तर पर अनुरोध के आधार पर मिले आवेदनों की समीक्षा करेंगे और 10 जून से पहले उन पर अंतिम निर्णय ले सकेंगे।
- धारा-27 पर मंथन: बैठक में स्थानांतरण अधिनियम की धारा-27 के प्रावधानों के तहत उन मामलों पर विशेष चर्चा की गई, जिनमें सामान्य परिस्थितियों से हटकर तबादलों की आवश्यकता होती है।
प्रतिस्थानी की बाध्यता में ढील: दुर्गम से सुगम की राह आसान
बैठक में उन कार्मिकों की समस्या का समाधान निकाला गया है जो दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवा पूरी कर चुके हैं, लेकिन प्रतिस्थानी (रिप्लेसमेंट) न मिलने के कारण सुगम क्षेत्रों में नहीं आ पा रहे थे।
- विभागाध्यक्ष का अधिकार: अब दुर्गम से सुगम में स्थानांतरण के लिए प्रतिस्थानी के मिलने का इंतजार अनिवार्य नहीं होगा। विभागाध्यक्ष अपने विभाग में उपलब्ध कुल कार्मिकों की संख्या और स्थिति का आकलन करते हुए ऐसे कर्मचारियों के तबादले का निर्णय ले सकेंगे। इससे लंबे समय से दुर्गम में तैनात कर्मचारियों की घर वापसी का रास्ता साफ होगा।
मानवीय दृष्टिकोण: गंभीर बीमारियों के आधार पर मिलेगा लाभ
सरकार ने स्थानांतरण नीति में मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देते हुए एक विशेष श्रेणी को शामिल किया है।
- गंभीर बीमारी में छूट: यदि किसी कार्मिक के माता-पिता गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं और घर में उनकी देखभाल करने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं है, तो ऐसे कार्मिकों को प्राथमिकता के आधार पर तबादला दिया जाएगा।
- स्थानांतरण समिति की भूमिका: ऐसे मामलों का निस्तारण विभागीय स्तर पर गठित ‘स्थानांतरण समिति’ में चर्चा के बाद किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जरूरतमंदों को ही इसका लाभ मिले।
विभिन्न विभागों के लिए दिशा-निर्देश
बैठक के दौरान शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों में कार्मिकों की वर्तमान स्थिति और स्थानांतरण की मांगों पर विस्तृत चर्चा की गई।
- शिक्षा विभाग पर विशेष ध्यान: क्योंकि शिक्षा विभाग में कार्मिकों की संख्या सर्वाधिक है, इसलिए वहां तबादलों के मानकों को लेकर अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
- पारदर्शिता सुनिश्चित करना: मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह न्यायसंगत हो और सरकारी कार्य में कोई बाधा न आए।





