काठमांडू: माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के इस व्यस्त सीजन (पीक सीजन) में पर्वतारोहियों को एक अप्रत्याशित और खतरनाक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। बेस कैंप और कैंप-1 के बीच स्थित ‘खुम्बु आइसफॉल’ इलाके में बर्फ का एक विशाल भंडार और अस्थिर हिमखंड (सेराक) लटक जाने के कारण ऊपर जाने वाला मुख्य रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। इस प्राकृतिक बाधा के चलते दुनिया भर से आए सैकड़ों पर्वतारोही बेस कैंप पर ही फंस गए हैं, जिससे इस साल के एवरेस्ट अभियान की तैयारियां कई हफ्तों पिछड़ गई हैं।
100 फीट ऊंचा हिमखंड बना काल: रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध
खुम्बु आइसफॉल, जो पहले से ही एवरेस्ट की चढ़ाई का सबसे खतरनाक हिस्सा माना जाता है, वहां इस बार हालात और भी गंभीर हो गए हैं।
- अस्थिर दीवार: कैंप-1 के ठीक नीचे बर्फ का लगभग 100 फीट ऊंचा एक विशाल खंड इस तरह लटक गया है कि वह किसी भी समय गिर सकता है।
- खतरा: यह हिमखंड बेहद अस्थिर है और इसका गिरना पर्वतारोहियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। सुरक्षा को देखते हुए अभियान आयोजकों ने फिलहाल चढ़ाई रोक दी है।
‘आइसफॉल डॉक्टर्स’ की कोशिशें नाकाम
बर्फ के रास्तों को दुरुस्त करने और रस्सियां बांधने में विशेषज्ञ शेरपाओं की टीम, जिन्हें ‘आइसफॉल डॉक्टर्स’ कहा जाता है, इस बाधा को हटाने में जुटी हुई है।
- बायपास की तलाश: विशेषज्ञों की इस टीम ने कई दिनों तक इस विशाल हिमखंड का कोई वैकल्पिक सुरक्षित रास्ता (बायपास) खोजने की कोशिश की, लेकिन बर्फ की संरचना और भौगोलिक स्थिति इतनी जटिल है कि कोई भी सुरक्षित मार्ग नहीं मिल सका।
- सुरक्षा पहले: नेपाल के पर्यटन विभाग के अधिकारी हिमाल गौतम ने स्थिति की गंभीरता स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में आगे बढ़ना आत्महत्या जैसा होगा, क्योंकि यह ‘सेराक’ (Serac) बेहद अस्थिर स्थिति में है।
वसंत ऋतु के अभियान पर अनिश्चितता के बादल
एवरेस्ट फतह के लिए वसंत का मौसम सबसे अनुकूल माना जाता है, लेकिन इस साल इस देरी ने पर्वतारोहियों और आयोजकों की चिंता बढ़ा दी है।
- बेस कैंप पर जमावड़ा: वर्तमान में बेस कैंप पर सैकड़ों पर्वतारोही और उनके सहयोगी शेरपा अनुकूल मौसम और रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
सीमित समय: एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए ‘विंडो’ (अनुकूल मौसम की अवधि) बहुत कम समय के लिए खुलती है। यदि रास्ता जल्द नहीं खुला, तो कई टीमों को बिना चढ़ाई किए ही वापस लौटना पड़ सकता है।





