पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बदलाव की सुगबुगाहट तेज है, लेकिन इस बार चुनौती बाहरी नहीं बल्कि गठबंधन के भीतर की है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अंदर सुलग रहे असंतोष और विधायकों की नाराजगी की खबरों ने एनडीए (NDA) खेमे में हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनके कद का उपयोग कर जेडीयू के भीतर पनप रहे ‘अविश्वास’ के कांटे को निकालने की तैयारी में है। विपक्ष द्वारा लगातार किए जा रहे ‘खेला’ होने के दावों और संभावित टूट की अटकलों के बीच, बीजेपी और जेडीयू नेतृत्व मिलकर एक ऐसा बड़ा संदेश देने की कोशिश में है, जिससे गठबंधन की स्थिरता पर कोई सवाल न उठे।
1. जेडीयू में असंतोष: नाराजगी की वजह क्या है?
पार्टी के भीतर कुछ विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के बीच पनप रहे असोह के मुख्य कारण निम्नलिखित माने जा रहे हैं:
- मंत्रिमंडल विस्तार और पद: कई विधायक लंबे समय से मंत्रिमंडल में जगह न मिलने या मनचाहा विभाग न मिलने से भीतर ही भीतर नाराज बताए जा रहे हैं।
- भविष्य की अनिश्चितता: नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं और बिहार की कमान किसी नए चेहरे को सौंपे जाने की सुगबुगाहट ने कुछ गुटों को असुरक्षित महसूस कराया है।
- विपक्ष का संपर्क: आरजेडी (RJD) और कांग्रेस गठबंधन लगातार जेडीयू के ‘नाराज’ विधायकों के संपर्क में होने का दावा कर रहा है, जिससे अविश्वास का माहौल बना है।
2. बीजेपी की रणनीति: नीतीश को बनाया ‘ढाल’
बीजेपी नेतृत्व को बखूबी पता है कि बिहार में एनडीए की मजबूती नीतीश कुमार की पकड़ पर निर्भर है:
- सीधा संवाद: बीजेपी के शीर्ष रणनीतिकार नीतीश कुमार के जरिए जेडीयू के उन विधायकों से सीधा संवाद साध रहे हैं जो बागी तेवर अपना सकते हैं।
- एकजुटता का प्रदर्शन: आने वाले दिनों में बीजेपी और जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं की संयुक्त बैठकें और साझा रैलियां आयोजित की जा सकती हैं, ताकि यह संदेश जाए कि गठबंधन में ‘सब कुछ ठीक है’।
- सत्ता का संतुलन: बीजेपी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह जेडीयू में किसी भी प्रकार की टूट को बर्दाश्त नहीं करेगी, क्योंकि इसका सीधा असर 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर पड़ेगा।
3. ‘टूट’ बनाम ‘भरोसा’: एनडीए का मास्टर प्लान
अविश्वास प्रस्ताव और संख्या बल के खेल को नाकाम करने के लिए एनडीए ने एक विस्तृत योजना तैयार की है:
- डैमेज कंट्रोल: जेडीयू के भीतर जो गुट नाराज है, उन्हें मनाने की जिम्मेदारी खुद नीतीश कुमार को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री स्वयं अपने विधायकों से वन-टू-वन मुलाकात कर रहे हैं।
- बड़ा राजनीतिक संदेश: बीजेपी का मानना है कि यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते भी हैं, तो उत्तराधिकारी का चयन ऐसा होना चाहिए जिससे जेडीयू के सभी गुटों को साथ रखा जा सके।
- विपक्ष पर पलटवार: एनडीए ने अपने प्रवक्ताओं को निर्देश दिया है कि वे विपक्ष के ‘टूट’ वाले नैरेटिव को मजबूती से काटें और सरकार की उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करें।





