देहरादून: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में उत्तराखंड के प्रतिष्ठित यूपीईएस (UPES) विश्वविद्यालय ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने घोषणा की है कि वे इस वर्ष देशभर की एक हजार (1000) मेधावी छात्राओं को विशेष छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) प्रदान करेंगे। ‘शक्ति’ पहल के तहत शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली महिलाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करना है। इस घोषणा के बाद शिक्षा जगत में यूपीईएस के इस प्रयास की सराहना हो रही है, क्योंकि यह कदम तकनीकी और पेशेवर शिक्षा में लैंगिक अंतर (Gender Gap) को कम करने में सहायक सिद्ध होगा।
छात्रवृत्ति योजना की मुख्य विशेषताएं: किसे मिलेगा लाभ?
विश्वविद्यालय ने इस स्कॉलरशिप के लिए कुछ विशेष मानक तय किए हैं:
- देशव्यापी चयन: यह छात्रवृत्ति केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि भारत के किसी भी राज्य की छात्राओं के लिए खुली है।
- पाठ्यक्रमों का दायरा: इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, बिजनेस, लॉ, डिजाइन और हेल्थ साइंसेज जैसे स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को इसका लाभ मिलेगा।
- मेरिट और आवश्यकता: चयन प्रक्रिया में छात्राओं के पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड (अकादमिक प्रदर्शन) और उनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति को मुख्य आधार बनाया जाएगा।
‘शक्ति’ पहल: केवल शिक्षा नहीं, सर्वांगीण विकास
UPES की यह स्कॉलरशिप उनकी व्यापक ‘शक्ति’ (Shakti) परियोजना का हिस्सा है:
- फीस में छूट: चयनित छात्राओं को उनकी ट्यूशन फीस में 20% से लेकर 100% तक की छूट मिल सकती है।
- मेंटरशिप प्रोग्राम: स्कॉलरशिप के साथ-साथ, इन 1000 महिलाओं को उद्योग जगत के विशेषज्ञों (Industry Experts) द्वारा विशेष मार्गदर्शन और ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
- नेतृत्व क्षमता: विश्वविद्यालय का लक्ष्य इन छात्राओं को भविष्य की लीडर के रूप में तैयार करना है, ताकि वे कॉरपोरेट और तकनीकी दुनिया में अपनी पहचान बना सकें।
विश्वविद्यालय प्रबंधन का विजन: “सशक्त महिला, सशक्त राष्ट्र”
UPES के कुलपति और प्रबंधन ने इस अवसर पर अपना संदेश साझा किया:
- समानता पर जोर: प्रबंधन का मानना है कि जब एक महिला शिक्षित होती है, तो पूरा परिवार और समाज प्रगति करता है।
- रुकावटों को दूर करना: अक्सर वित्तीय बाधाओं के कारण मेधावी छात्राएं अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देती हैं; यह स्कॉलरशिप ऐसी बाधाओं को दूर करने का एक ठोस प्रयास है।





