विकासनगर (देहरादून): उत्तराखंड के पहले रामसर स्थल ‘आसन कंजर्वेशन रिजर्व’ (आसन वेटलैंड) में सर्दियों का प्रवास बिताने आए विदेशी मेहमान अब अपने वतन लौटने लगे हैं। मार्च के पहले सप्ताह में ही तापमान में आई अचानक बढ़ोतरी और गर्मी के बढ़ते असर के कारण इन प्रवासी पक्षियों ने मध्य एशिया और यूरोप की ओर वापसी की उड़ान भरनी शुरू कर दी है। हर साल सर्दियों में हजारों मील का सफर तय कर आने वाले इन परिंदों की रवानगी के साथ ही अब आसन झील के किनारों पर पक्षियों का शोर (कलरव) कम होने लगा है, जिससे पक्षी प्रेमियों में मायूसी है।
तापमान में उछाल ने समय से पहले किया विदा
आसन वेटलैंड में पक्षियों की वापसी के पीछे मुख्य कारण बदलता मौसम है:
- गर्मी का प्रभाव: प्रवासी पक्षी ठंडे वातावरण में रहने के आदी होते हैं। मार्च की शुरुआत में ही तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने के कारण इन पक्षियों को यहाँ रहने में कठिनाई होने लगी है।
- अनुकूल समय: पक्षी वैज्ञानिक बताते हैं कि परिंदे मार्च के अंत तक रुकते थे, लेकिन इस बार गर्मी के जल्दी आने से उनकी रवानगी का सिलसिला फरवरी के अंतिम सप्ताह से ही शुरू हो गया था।
- लंबा सफर: इन पक्षियों को हिमालय के ऊंचे पहाड़ों को पार कर साइबेरिया, रूस, मंगोलिया और मध्य एशिया के ठंडे इलाकों तक पहुँचना है, जिसके लिए वे ठंडे मौसम का ही चुनाव करते हैं।
कौन-कौन से मेहमानों ने भरी उड़ान?
आसन झील में इस बार कई दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी देखे गए थे, जो अब धीरे-धीरे कम हो रहे हैं:
- सुर्खाब (Ruddy Shelduck): चमकीले केसरिया रंग वाले ये पक्षी, जो तिब्बत और लद्दाख के क्षेत्रों से आते हैं, अब काफी कम संख्या में बचे हैं।
- मल्लार्ड और गड़वाल: यूरोप से आने वाली बत्तखों की इन प्रजातियों ने भी अपना बोरिया-बिस्तर समेटना शुरू कर दिया है।
- कॉमन पोचार्ड और विजन: झील के गहरे पानी में तैरने वाले ये परिंदे अब अपने झुंड बनाकर उत्तर की दिशा में कूच कर रहे हैं।
- बार-हेडेड गूज: दुनिया की सबसे ऊंची उड़ान भरने वाले ये पक्षी भी वापसी की तैयारी में हैं।
पर्यटन और स्थानीय आर्थिकी पर असर
पक्षियों की विदाई का सीधा असर पर्यटन पर भी पड़ता है:
- पक्षी प्रेमियों की कमी: सर्दियों के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक और फोटोग्राफर्स आसन पहुँचते थे, लेकिन अब झील में केवल स्थानीय पक्षी (जैसे बगुले, जलमुर्गी) ही नजर आ रहे हैं, जिससे पर्यटकों की आमद कम हो गई है।
- वन विभाग की निगरानी: वन विभाग की टीमें अब परिंदों की गिनती और उनकी वापसी के रूट पर नजर रख रही हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी वापसी सुरक्षित हो।





